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बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के प्रचार के बीच तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने आदिवासियों और स्थानीय पहचान को लेकर भाजपा के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. उन्होंने भाजपा पर आदिवासियों के अधिकारों से खिलवाड़ करने का आरोप लगाया और कहा कि UCC से अनुसूचित जनजाति (ST) सबसे ज्यादा प्रभावित होगी। गुरुवार को झारग्राम जिले के गोपीबल्लभपुर में एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए अभिषेक ने प्रस्तावित समान नागरिक संहिता (UCC) और कुड़माली भाषा की मान्यता के मुद्दों पर केंद्र सरकार को जमकर आड़े हाथ लिया।
झाड़ग्राम रैली में अभिषेक बनर्जी ने भाजपा पर आदिवासियों की संस्कृति से खिलवाड़ का आरोप लगाया। कुड़माली भाषा की मान्यता और यूसीसी के प्रतिकूल प्रभावों को लेकर उन्होंने केंद्र सरकार को घेरा।
बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के प्रचार के बीच तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने आदिवासियों और स्थानीय पहचान को लेकर भाजपा के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. गुरुवार को झारग्राम जिले के गोपीबल्लभपुर में एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए अभिषेक ने प्रस्तावित समान नागरिक संहिता (UCC) और कुड़माली भाषा की मान्यता के मुद्दों पर केंद्र सरकार को जमकर आड़े हाथ लिया. उन्होंने दावा किया कि भाजपा का यूसीसी मॉडल आदिवासी समुदाय की संस्कृति और प्रथाओं के लिए बड़ा खतरा है.
टीएमसी नेता अभिषेक बनर्जी ने झारग्राम रैली में बीजेपी पर कड़ा हमला बोलते हुए कहा कि समान नागरिक संहिता (UCC) लागू होने से आदिवासियों की अनूठी संस्कृति, परंपराएं और रीति-रिवाज खत्म हो जाएंगे।
भाजपा द्वारा महिलाओं को प्रति माह 3,000 रुपए की आर्थिक सहायता देने के वादे पर भी जनता को आगाह किया. अभिषेक बनर्जी ने उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा शासित किसी भी राज्य में ऐसी कोई योजना धरातल पर नहीं है. उन्होंने महिलाओं से अपील की कि वे भाजपा के ऐसे किसी भी फॉर्म को न भरें, क्योंकि यह केवल वोट पाने का एक हथकंडा है.
भाजपा द्वारा बंगाल चुनाव के घोषणा-पत्र में यूसीसी लागू करने के वादे पर पलटवार करते हुए अभिषेक बनर्जी ने कहा कि इससे आदिवासी समुदायों के अपने रीति-रिवाज और पारंपरिक प्रथाएं खत्म हो जायेंगी। भाजपा इन समुदायों पर अपनी नीतियां थोपना चाहती है. उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा लोगों को धार्मिक और जातीय आधार पर बांटकर सत्ता हासिल करना।
केंद्र सरकार पर कुड़माली भाषा को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया। झारग्राम और जंगलमहल के बड़े वोट बैंक कुर्मी समाज को साधते हुए अभिषेक बनर्जी ने भाषाई मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल की ममता सरकार ने 2 महीने पहले ही केंद्र को पत्र लिखकर इस भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने की सिफारिश की थी।
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