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बहरामपुर लोकसभा में मुर्शीदाबाद जिले की सात विधानसभा सीटें आती हैं। 2021 विधानसभा चुनावों में टीएमसी ने बहरामपुर सीट को छोड़कर सभी पर जीत हासिल की थी, हालांकि लोकसभा चुनावों में पार्टी को दो सीटों पर लीड नहीं मिली थी। इसमें बहरामपुर और बरवान (रिजर्व) सीटें शामिल थीं। बरवान में बीजेपी और बहरामपुर में कांग्रेस को लीड मिली थी। ऐसे में युसूफ पठान के सामने चुनौती है कि वह अपनी लोकसभा में तृणमूल कांग्रेस को मजबूत करें। बहरामपुर से अधीर रंजन चौधरी के उतरने से इस सीट पर मामला त्रिकोणीय रहने की उम्मीद की जा रही है।
पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों के लिए 9 अप्रैल को केरल, असम और पुडुचेरी में वोट डाले जाएंगे। इसके बाद चुनावी फोकस तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल पर शिफ्ट हो जाएगा। फिलहाल ममता बनर्जी मुर्शीदाबाद, मालदा समेत तमाम क्षेत्रों में मोर्चा संभाले हुए हैं। बहरामपुर पर नजरें इसलिए भी लगी है क्योंकि यह मुस्लिम बहुल क्षेत्र है। यहां सेयुसूफ पठानने 85 हजार से अधिक वाेटों से अधीर रंजन चौधरी को शिकस्त दी थी। इस लोकसभा क्षेत्र की सीटों से युसूफ पठान की लोकप्रियता और उनके पब्लिक कनेक्ट का भी टेस्ट होगा। बहरामपुर में पहले चरण के तहत 23 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे। युसूफ पठान गुजरात के वडोदरा के रहने वाले हैं।
अधीर रंजन चौधरीबहरामपुर लोकसभा सीट से पांच बार सांसद चुने जा चुके हैं। युसूफ पठान को 524,516 वोट मिले थे जबकि अधीर रंजन चौधरी को 439,494 वोट और बीजेपी के निर्मल कुमार साहा को तब 371,886 वोट हासिल हुए थे। ऐसे में बहरामपुर में बाजी किसके पक्ष में रहेगी? इस पर सभी की नजरें टिकी है। टीएमसी, कांग्रेस और बीजेपी के साथ इस क्षेत्र में हुमायूं कबीर ने कैंडिडेट उतारे हैं।
मुर्शीदाबाद जिले में कुल 22 विधानसभा सीटें हैं।तृणमूल कांग्रेस (TMC) से निलंबित विधायकहुमायूं कबीर2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में मुर्शिदाबाद जिले की दो सीटों रेजिनगर और नाओदा से चुनाव लड़ रहे हैं। उन्होंने अपनी पुरानी सीट भरतपुर छोड़कर इन नई सीटों को चुना है। रेजिनगर मुर्शीदाबाद जिले में आती है। ऐसे में अधीर रंजन चौधरी की मौजूदगी और हुमायूं कबीर की बगावत के बीच क्या युसूफ पठान क्या टीएमसी के लकी मुस्लिम बन पाएंगे। यह 4 मई को तय होगा?
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