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Abhyuday Bharat News / Wed, Apr 8, 2026 / Post views : 47
धूल भरी आंधी के साथ शुरू हुई बारिश से बचने के लिए पर्यटक रॉयल गेट के नीचे खड़े हो गए थे। तभी अचानक से गेट के ऊपरी हिस्से में लगे पच्चीकारी वाले पत्थर नीचे गिरने लगे। इससे बचने के लिए पर्यटकों में अफरा-तफरी मच गई। हालांकि पत्थर के टुकड़ों से किसी को कोई चोट नहीं पहुंची।
इस घटना के बाद ताजमहल के रखरखाव और पत्थरों की मजबूती को लेकर सवाल उठने लगे हैं। पिछले कई वर्षों से ऐतिहासिक स्मारकों में पत्थर गिरने की घटनाएं बढ़ी हैं। फतेहपुर सीकरी के बुलंद दरवाजे पर लगे पत्थर की तस्तरी और उस पर बनी गोलाकार पत्थर कई बार नीचे गिर चुके हैं।
इससे पहले ताजमहल को नुकसान साल 2018 में 130 किलोमीटर की रफ्तार से आई आंधी से हुआ था। तब रॉयल गेट के तीन छोटे गुंबद और पत्थर नीचे के गिरे थे। वहीं दक्षिणी गेट की एक मीनार नीचे गिर गई थी। इसके अलावा पिछले साल 2024 में भी ताजमहल के रॉयल गेट से कई पत्थर गिरे थे जिससे नुकसान हुआ था।
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