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Abhyuday Bharat News / Wed, Apr 8, 2026 / Post views : 39
मोहन भागवत मंगलवार को वृंदावन के वंशीवट क्षेत्र स्थित मलूक पीठ में संत मलूकदास महाराज के 452वें जयंती महोत्सव को संबोधित कर रहे थे। संघ प्रमुख ने कहा कि आज पूरी दुनिया को भारत के प्रकाश की आवश्यकता है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि हमारी रीति और नीति पूरी तरह से आध्यात्मिक परंपराओं पर आधारित होनी चाहिए। भागवत ने कहा कि सत्य के आधार पर जीवन खड़ा होना चाहिए। हमें संतों का सान्निध्य प्राप्त है और उनके शब्दों के पीछे छिपे भाव को आत्मसात कर हमें आगे बढ़ना है। मलूक पीठ ने 452 वर्षों से इस महान परंपरा को जीवंत रखा है, जो सभी के लिए प्रेरणापुंज है।
समाज में एकता और संवेदनशीलता का आह्वान करते हुए उन्होंने कहा कि सत्य और करुणा के बिना धर्म का कोई अस्तित्व नहीं है। उन्होंने कहा कि करुणा जीवन में तब आती है, जब हमें सबका दुख अपना दुख लगने लगे। हालांकि, देश के 142 करोड़ लोगों का 'संत' बनना संभव नहीं है, लेकिन हर नागरिक का जीवन शुचिता पवित्रता पूर्ण हो, इसके लिए हमें प्रयास करने होंगे।
मलूक पीठ के महंत राजेंद्र दास महाराज द्वारा गौ-हत्या पर पूर्ण प्रतिबंध की मांग का समर्थन करते हुए संघ प्रमुख ने एक व्यावहारिक मंत्र दिया। उन्होंने कहा कि कानून से ज्यादा समाज की शक्ति प्रभावी होती है। उन्होंने कहा कि समाज को इतना गौ-भक्त बना दो कि गौ-हत्या अपने आप रुक जाए। लोगों को इसके लिए सामर्थ्यवान बनाना होगा। जिस तरह श्रीराम मंदिर के लिए पूरे देश में एक सशक्त जनभावना दिखी थी, वैसी ही भावना गाय के प्रति जगानी होगी। जब देश में ऐसी जनभावना खड़ी होगी, तो सरकार को भी इसे मानना होगा। उन्होंने संकल्प दोहराया कि संघ गाय के महत्व को जन-जन तक पहुंचाने और लोगों में जागृति लाने की दिशा में सक्रिय रूप से कार्य करेगा।
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