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उत्तर प्रदेश:- चित्रकूट न्यूज़ : योगी जी… आपके सिस्टम ने मार डाला! सुशासन सरकार में पुलिस ने नहीं दर्ज किया था रेप का केस, दलित युवती ने तंग आकर दी जान,

Abhyuday Bharat News / Wed, Apr 15, 2026 / Post views : 258

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चित्रकूट:- ये कहना कतई गलत नहीं है कि यूपी का सिस्टम सड़ चुका है। सड़न ऐसी की उसका असर कानून व्यवस्था पर साफ देखने को मिल रहा है, जिसका खामियाजा प्रदेश की बहन-बेटियां अपनी इज्जत देकर चुका रहीं हैं! उसके बाद भी योगी सरकार सुशासन और जीरो टॉलरेंस का राग अलापते थकती नहीं, पोस्टर और बयानों में भले ही योगी सरकार कानून व्यवस्था को लेकर ‘ऑल इज वेल’ होने का दावा करती है, लेकिन असल में कानून व्यवस्था ‘नॉट आल इज वेल’ है।सड़ चुके कानून व्यवस्था का ही नतीजा है कि चित्रकूट में गैंगरेप पीड़िता ने इंसाफ न मिलने पर फांसी लगाकर जान दे दी। ऐसे में सवाल प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से पूछना लाजमी है कि क्या यही है आपका जीरो टॉलरेंस औऱ सुशासन नीति? सवाल ये भी कि फंदे पर लड़की की लटकर मौत हुई है या प्रदेश के कानून व्यवस्था की भी!

बता दें कि पूरा मामला पहाड़ी थाना क्षेत्र के एक गांव का है। जहां रहने वाली किशोरी बीते 4 मार्च होली के दिन पानी भरने के लिए घर से कुछ ही दूरी पर गई थी। जहां तीन लड़कों ने उसको पकड़ लिया और फिर खेत में ले जाकर बारी-बारी से रेप की वारदात को अंजाम दिया। गैगरेप के बाद तीनों लड़की को खेत में ही बदहवास अवस्था में छोड़कर फरार हो गए। वहीं जब किशोरी घर नहीं पहुंची तो उसका भाई खोजते हुए खेत पर पहुंचा। जहां किशोरी बदहवास अवस्था में मिली। जिसके बाद वह अपनी बहन को घर ले गया। होश आने पर उसने मामले की जानकारी अपने परिजनों को दी।

परिजनों ने थाने पहुंचकर बेटी के साथ गैंगरेप होने की शिकायत पुलिस से की। इस दौरान पुलिस वालों ने केस को डायवर्ट करते हुए कहा कि अगर तुम रेप का केस दर्ज कराओगे तो तुम्हारी बेटी से शादी कोई नहीं करेगा। ऐसे में तीनों युवकों के खिलाफ किसी हल्की धारा में केस दर्ज करवा दो। इस दौरान पुलिस ने सिर्फ रंग लगाने की शिकायत दर्ज कर परिजनों को घर लौटा दिया था। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने तीनों आरोपियों को थाने बुलाकर कुछ महीनों तक गांव में न दिखने की हिदायत दी थी। कुछ दिन तक तीनों आरोपी गायब रहे, लेकिन फिर से गांव में घूमने लगे।

परिजनों का साफ कहना है कि तीनों आरोपियों को घूमता देख बेटी परेशान रहती थी। कार्रवाई न होने से आहत होकर बेटी ने फांसी लगाकर जान दे दी। अब पुलिस परिजनों की शिकायत पर तीनों आरोपियों की तलाश में जुट गई है। आरोपियों के घर वालों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। ऐसे में सवाल ये उठता है कि पुलिस ने उस वक्त रेप का केस दर्ज क्यों नहीं किया था? सवाल ये भी कि क्या उसे केवल इसीलिए न्याय नहीं दिया गया, क्य़ोंकि वह दलित जाति की थी?

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