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नई दिल्ली: भारत के पड़ोसी देश नेपाल में नए चुने गए प्रधानमंत्री बालेन शाह ने सत्ता में आते ही 17 देशों के राजदूतों से काठमांडू में मुलाकात की। इसमें भारत, चीन, अमेरिका, जापान, पाकिस्तान, बांग्लादेश, कतर और संयुक्त राष्ट्र के रेजिडेंट कोऑर्डिनेटर भी थे। इसी के साथ ही यह कयास लगने शुरू हो गए कि बालेन शाह सरकार की विदेश नीति कैसी होगी? खासतौर पर भारत के प्रति। बालेन शाह की राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी नई होने की वजह से ये कयास लगाए जा रहे हैं कि नेपाल का झुकाव भारत या चीन में से किस तरफ होगा? इस बीच, भारत ने नेपाल सीमा तक हाइवे दौड़ाने का भी प्लान कर लिया है। भारत के सड़क एवं राजमार्ग परिवहन मंत्रालय ने कहा है कि केंद्रीय कैबिनेट ने 4 लेन की बाराबंकी-बहराइच सड़क बनाए जाने को मंजूरी दी है, जो नेशनल हाइवे-927 का हिस्सा होगा। यह रास्ता भारत और नेपाल के संबंधों को और मजबूती देगा। भारत इस वक्त नेपाल का सबसे बड़ा कारोबारी पार्टनर है। यह नेपाल के कुल ट्रेड का 60 फीसदी से ज्यादा है। यह बताता है कि दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंध कितना मायने रखते हैं।
मंत्रालय ने कहा है-नया NH-927 तेज और ज्यादा भरोसेमंद कारोबारी संपर्क को बढ़ावा देगा। यह हाइवे प्रोजेक्ट करीब 50 फीसदी परिवहन समय को कम करेगा।
इससे बाराबंकी से बहराइच के बीच दूरी तय करने में 150 मिनट के बजाय 75 मिनट ही लगेगा। इससे वाहनों की रफ्तार 40 किलोमीटर प्रति घंटे से बढ़ाकर 80 किमी प्रति घंटे तक की जा सकती है। इस हाइवे के बनने से चाचल, गेहूं, सब्जियां, डेयरी प्रोडॅक्ट्स समेत सभी जरूरी चीजें तेजी से भारतीय बाजारों से नेपाल तक पहुंच सकेंगी।
नेपाल की विदेश नीति में अभी तक परंपरागत ट्रेंड यह रहा है कि भारत और चीन शीर्ष प्राथमिकता में रहे हैं। नेपाली कांग्रेस जहां नेपाल के भारत के करीब रहने की पक्षधर रही है तो वहीं, कम्युनिस्ट और माओवादी अक्सर चाइना कार्ड का इस्तेमाल करते रहे हैं। यह चक्र हर बार नए लीडर के आने के साथ बदलता रहा है।
पीएम बालेन शाह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भारत दौरे के न्योते को स्वीकार कर लिया है।
मॉरीशस में हुई हिंद महासागर सम्मेलन से इतर खनाल यह बात कही। उन्होंने कहा कि जैसे ही चुनाव खत्म होंगे पीएम मोदी हमारे लीडरों से बात करेंगे।
खनाल ने बताया कि उन्होंने मॉरीशस में भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर से भी बात की है। खनाल ने नेपाल की विदेश नीति पर जोर देते हुए कहा कि यह राष्ट्रीय हितों के मुताबिक होगी। नए का मतलब अलगाव नहीं है। हमारे मौलिक मूल्य पहले जैसे ही रहेंगे। पड़ोसियों और पार्टनर्स के साथ संबंध राष्ट्रीय हित से जुड़े होंगे।
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