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नई दिल्ली: ईरान और अमेरिका के बीच सीजफायर कायम रखने को लेकर दूसरे दौर की बातचीत की कोशिशों के बीच भारत में ईरानी दूतावास ने विश्व भर में मौजूद ईरानी दूतावासों को बहुत बड़ा संकेत भेजा। यह संकेत भारत को लेकर है। ईरान को लगता है कि पश्चिम एशिया संकट की वजह से दुनिया भर में जो मुश्किल हालात पैदा हुए हैं, भारत कहीं न कहीं उससे खुद को बहुत ज्यादा प्रभावित होने से बचा लिया
है।
भारत में ईरानी दूतावास ने अपने एक्स हैंडल पर एक लाइन का एक पोस्ट किया, जो सीधे तौर परमौजूदा जियोपॉलिटिक्स में भारत की स्थितिकी ओर इशारा करता है। हालांकि, बाद में ईरानी दूतावास ने वह ट्वीट डिलीट कर दिया। लेकिन, इसमें जो तस्वीरें लगी थीं और जो लिखा गया था, उसकी अहमियत खत्म नहीं हुई है।
इस एक्स पोस्ट को दक्षिण अफ्रीका, थाईलैंड, यूनाइटेड किंगडम, जिम्बाब्वे और बुल्गारिया स्थित ईरानी दूतावासों को टैग किया गया है। यह ट्यूनीशिया स्थित ईरानी दूतावास के एक पोस्ट के जवाब में है, जिसे ईरान युद्ध की वजह से भारी मुश्किलें झेलनी पड़ रही हैं।

दरअसल, ट्यूनीशिया दुनिया के उन देशों में शामिल है, जिसकी पहले से खराब अर्थव्यवस्थापश्चिम एशिया युद्धकी वजह से पूरी तरह से चरमरा गई है।
ईरान युद्ध की वजह से उसे योजनागत बजट में संशोधन की नौबत आ चुकी है, खर्चे कम करने पड़ रहे हैं।
बस करो, यारों- तुमको तो पहले से ही१ पता है कि बॉस कौन है।
भारत में ईरानी दूतावास
पश्चिम एशिया संकट के बाद भी भारत का निर्यात वित्त वर्ष 2026 में रिकॉर्ड पर पहुंच गया है।
भारत ने 441.8 अरब डॉलर का निर्यात किया है, जो कि पिछले वित्त वर्ष से भी 1% ज्यादा है।
आईएमएफ ने भारत पर मंडराते तेल और गैस संकट के बावजूद वित्त वर्ष 2027 के लिए जीडीपी वृद्धि दर 6.5% रहने का अनुमान जताया है।
यह आईएमएफ के ही जनवरी के अनुमानों से 0.1% अधिक है।
इसी तरह एडीबी ने चालू वित्त वर्ष में 6.9% और अगले वित्त वर्ष के लिए 7.3% जीडीपी वृद्धि दर की भविष्यवाणी की है।
28 फरवरी को जब अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर हमला बोला था तो इस तरह की आशंकाएं जताई जा रही थीं कि भारत की कूटनीति हमलावरों की ओर झुकी हुई है।
खासकर जिस तरह से ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई खामेनेई की इन हमलों में मौत हुई, उसपर भारत की शुरुआती चुप्पी ने आशंकाओं को और हवा दी।
लेकिन, जैसे ही आधिकारिक तौर पर विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने 5 मार्च, 2026 को दिल्ली में ईरानी दूतावास जाकर औपचारिक तौर पर खामेनेई को श्रद्धांजलि दी, सारी आशंकाएं संभावनाओं में बदलनी शुरू हो गई।
तथ्य यह है कि ईरान की सहमति से जितने भी जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरे हैं, उनमें सबसे ज्यादा संख्या भारतीय जहाजों की है।
ईरान ने यह भी कहा है कि उसने एक भी भारतीय जहाज से कोई भी टोल नहीं लिया है।
दूसरी तरफ भारत का अमेरिका और इजरायल के साथ भी पहले की तरह ही अलग कूटनीति चल रही है।
युद्ध शुरू होने से पहले खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इजरायल होकर आए हैं तो अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दो-दो बार उनसे फोन पर लंबी बातचीत करके पश्चिम एशिया संकट पर भरोसे में लेने की कोशिश की है।
पीएम मोदी से लेकर विदेश मंत्री एस जयशंकर और विदेश सचिव विक्रम मिसरी तक, दुनिया भर के वैश्विक नेताओं के साथ संपर्क में हैं, जिनमें युद्ध में शामिल तमाम देश भी शामिल हैं।
इस तरह से भारत ने इस वैश्विक संकट की घड़ी में भी राष्ट्रहित को हमेशा प्राथमिकतायुद्ध के बाद भी भारत की मजबूत इकॉनमी
पश्चिम एशिया संकट के बाद भी भारत का निर्यात वित्त वर्ष 2026 में रिकॉर्ड पर पहुंच गया है।
भारत ने 441.8 अरब डॉलर का निर्यात किया है, जो कि पिछले वित्त वर्ष से भी 1% ज्यादा है।
आईएमएफ ने भारत पर मंडराते तेल और गैस संकट के बावजूद वित्त वर्ष 2027 के लिए जीडीपी वृद्धि दर 6.5% रहने का अनुमान जताया है।
यह आईएमएफ के ही जनवरी के अनुमानों से 0.1% अधिक है।
इसी तरह एडीबी ने चालू वित्त वर्ष में 6.9% और अगले वित्त वर्ष के लिए 7.3% जीडीपी वृद्धि दर की भविष्यवाणी की है।
भारत की कूटनीति को लेकर दूर हुई आशंकाएं
28 फरवरी को जब अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर हमला बोला था तो इस तरह की आशंकाएं जताई जा रही थीं कि भारत की कूटनीति हमलावरों की ओर झुकी हुई है।
खासकर जिस तरह से ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई खामेनेई की इन हमलों में मौत हुई, उसपर भारत की शुरुआती चुप्पी ने आशंकाओं को और हवा दी।
लेकिन, जैसे ही आधिकारिक तौर पर विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने 5 मार्च, 2026 को दिल्ली में ईरानी दूतावास जाकर औपचारिक तौर पर खामेनेई को श्रद्धांजलि दी, सारी आशंकाएं संभावनाओं में बदलनी शुरू हो गई।
युद्ध शुरू के बाद भारत-ईरान-अमेरिका संबंध
तथ्य यह है कि ईरान की सहमति से जितने भी जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरे हैं, उनमें सबसे ज्यादा संख्या भारतीय जहाजों की है।
ईरान ने यह भी कहा है कि उसने एक भी भारतीय जहाज से कोई भी टोल नहीं लिया है।
ईरान की ओर से बार-बार भारतीय जनता, भारत सरकार को सहयोग के लिए सराहना की जा रही है और दोनों देशों की मित्रता के कसीदे पढ़े जा रहे हैं।
दूसरी तरफ भारत का अमेरिका और इजरायल के साथ भी पहले की तरह ही अलग कूटनीति चल रही है।
युद्ध शुरू होने से पहले खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इजरायल होकर आए हैं तो अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दो-दो बार उनसे फोन पर लंबी बातचीत करके पश्चिम एशिया संकट पर भरोसे में लेने की कोशिश की है।
पीएम मोदी से लेकर विदेश मंत्री एस जयशंकर और विदेश सचिव विक्रम मिसरी तक, दुनिया भर के वैश्विक नेताओं के साथ संपर्क में हैं, जिनमें युद्ध में शामिल तमाम देश भी शामिल हैं।
इस तरह से भारत ने इस वैश्विक संकट की घड़ी में भी राष्ट्रहित को हमेशा प्राथमिकता दी है, लेकिन सभी देशों के साथ रिश्ते भी पहले की तरह बनाए रखे हैं। दी है, लेकिन सभी देशों के साथ रिश्ते भी पहले की तरह बनाए रखे हैं।
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