ब्रेकिंग
सूचना
नई दिल्ली: सूर्यकुमार यादव की कप्तानी में भारत ने भले ही टी20 वर्ल्ड कप का खिताब सफलतापूर्वक डिफेंड कर लिया हो, लेकिन खुद उनकी बल्लेबाजी फॉर्म ने चयनकर्ताओं की चिंता बढ़ा दी है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या सूर्या 2028 के लॉस एंजिल्स ओलंपिक और ऑस्ट्रेलिया में होने वाले टी20 वर्ल्ड कप की योजनाओं का हिस्सा रहेंगे? इस कड़ी में, जून-जुलाई में होने वाला भारत का इंग्लैंड और आयरलैंड दौरा कप्तान के लिए अग्निपरीक्षा साबित होने वाला है, जहां उनकी कप्तानी से ज्यादा उनकी बल्लेबाजी पर पैनी नजर रहेगी
।2025 का खराब दौर और वर्ल्ड कप की नाकामी
सूर्यकुमार यादव के लिए साल 2025 बेहद खराब रहा था, जहां उनका स्ट्राइक रेट 120 से नीचे गिर गया और वे पूरे साल एक भी अर्धशतक नहीं लगा सके। हालांकि, 2026 की शुरुआत में उन्होंने 160 के स्ट्राइक रेट से चार अर्धशतक जड़कर वापसी के संकेत दिए, लेकिन टी20 वर्ल्ड कप के बड़े मैचों में वे फिर फुस्स नजर आए।
बनाम दक्षिण अफ्रीका: 18 रन
बनाम वेस्टइंडीज: 18 रन
सेमीफाइनल (बनाम इंग्लैंड): 11 रन
फाइनल (बनाम न्यूजीलैंड): 0
अमेरिका के खिलाफ पहले मैच को छोड़ दिया जाए, तो खिताब जीतने के सफर में सूर्या के बल्ले से कोई बड़ी पारी नहीं निकली। अब जबकि टीम इंडिया के टॉप ऑर्डर में जबरदस्त फायरपावर मौजूद है और वैभव सूर्यवंशी जैसे युवा खिलाड़ी अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं, सूर्या के लिए खुद को साबित करना जरूरी हो गया है।
मुख्य कोच गौतम गंभीर अभी भी सूर्यकुमार को अपनी पहली पसंद मानते हैं और उम्मीद कर रहे हैं कि उनका खुद का अनुबंध 2028 वर्ल्ड कप तक बढ़ाया जाए। लेकिन, अजीत अगरकर की अध्यक्षता वाली चयन समिति के विचार थोड़े अलग हो सकते हैं। ओलंपिक 2028 के समय सूर्या 38 साल के हो जाएंगे, जो टी20 जैसे तेज फॉर्मेट के लिहाज से काफी ज्यादा है। बीसीसीआई के एक सूत्र ने पीटीआई को बताया, 'सूर्या अभी टीम का नेतृत्व कर रहे हैं, लेकिन एक बल्लेबाज के रूप में उन्हें निरंतरता बनाए रखनी होगी। वे यूके (UK) दौरे पर कप्तानी करेंगे, लेकिन उसके बाद 2028 तक की चर्चा पूरी तरह से उनके प्रदर्शन पर आधारित होगी।'
जून-जुलाई में होने वाला इंग्लैंड और आयरलैंड दौरा यह तय कर देगा कि सूर्या को अगले दो साल का ग्रेस पीरियड मिलेगा या नहीं। यदि वे अपनी पुरानी मिस्टर 360 वाली लय हासिल नहीं कर पाते हैं, तो चयनकर्ता भविष्य की ओर देखते हुए कप्तानी और बल्लेबाजी दोनों मोर्चों पर कड़े फैसले ले सकते हैं। भारत के पास प्रतिभा की कमी नहीं है, ऐसे में सूर्या को केवल अपने नाम पर नहीं, बल्कि काम पर ध्यान देना होगा।
Tags :
SORTS
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन