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: शहीद महेन्द्र कर्मा विश्वविद्यालय में भर्ती घोटाला: एनएसयूआई ने उच्च शिक्षा सचिव से की शिकायत, जांच और कार्रवाई का मिला आश्वासन

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शहीद महेन्द्र कर्मा विश्वविद्यालय, बस्तर (जगदलपुर) में शैक्षणिक पदों पर हुई नियुक्तियों को लेकर एक बार फिर विवाद गहराता जा रहा है। विश्वविद्यालय में 59 पदों की भर्ती प्रक्रिया में व्यापक अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोप सामने आए हैं। एनएसयूआई के प्रदेश सचिव रंजेश सिंह ने इस मामले को लेकर उच्च शिक्षा विभाग के सचिव एस. भारतीदासन से मंत्रालय, महानदी भवन में मुलाकात की और विस्तृत शिकायत सौंपी। उन्होंने कुलपति प्रो. मनोज कुमार श्रीवास्तव और तत्कालीन कुलसचिव के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की।

रंजेश सिंह ने बताया कि 5 अक्टूबर 2023 को 59 पदों के लिए विज्ञापन जारी किया गया था। इस विज्ञापन के तहत 5 मई से 23 मई 2025 तक 11 विषयों में से 5 विषयों के लिए साक्षात्कार आयोजित किए गए। इसके तुरंत बाद 24 मई 2025 को 10 उम्मीदवारों की सहायक प्राध्यापक पदों पर नियुक्ति कर दी गई। लेकिन न तो मेरिट सूची जारी की गई और न ही चयन सूची सार्वजनिक की गई, जिससे पारदर्शिता पर सवाल उठे हैं। साक्षात्कार में भाग लेने वाले अभ्यर्थी चयन प्रक्रिया की जानकारी से वंचित रह गए। ⭕  स्वीकृत पदों और विज्ञापन में भारी अंतर उच्च शिक्षा विभाग से स्वीकृत 59 पदों में 10 प्राध्यापक, 19 सह-प्राध्यापक और 30 सहायक प्राध्यापक पद शामिल थे। लेकिन विश्वविद्यालय ने स्वीकृत संख्या से अधिक पदों का विज्ञापन जारी किया। सह-प्राध्यापक के एक और सहायक प्राध्यापक के तीन अतिरिक्त पद विज्ञापन में शामिल कर दिए गए। यही नहीं, बी.एड विभाग के चार व्याख्याता पदों की भर्ती भी शामिल की गई, जबकि इसके लिए विभागीय अनुमति ही नहीं थी।  ⭕ आरक्षण और आयु सीमा नियमों की अनदेखी रंजेश सिंह ने आरोप लगाया कि कुलपति और कुलसचिव द्वारा तैयार किया गया आरक्षण रोस्टर पूरी तरह से नियमों के खिलाफ था। साथ ही आयु सीमा में छूट के नियमों को भी करते हुए शासन की अनुमति के बिना अधिक आयु के अभ्यर्थियों को साक्षात्कार में शामिल किया गया। इससे कई योग्य उम्मीदवार आवेदन से वंचित रह गए। इस प्रक्रिया में भारी आर्थिक लेनदेन की भी शिकायतें मिली हैं। कुछ अभ्यर्थियों से 20 से 30 लाख रुपए तक की रिश्वत लेने के आरोप लगाए गए हैं। ⭕ पहले भी की गई थी शिकायत एनएसयूआई प्रदेश सचिव ने यह भी बताया कि उन्होंने 29 अप्रैल 2025 को ईमेल के माध्यम से सचिव को पूरे मामले की जानकारी दे दी थी, लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन ने इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी और जल्दबाजी में साक्षात्कार प्रक्रिया को आगे बढ़ा दिया। ### दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की मांग एनएसयूआई ने कुलपति और कुलसचिव को तत्काल निलंबित कर हटाने, विभागीय जांच कराने और पूरे भर्ती मामले की न्यायिक जांच की मांग की है। साथ ही विश्वविद्यालय में फैले प्रशासनिक और वित्तीय कुप्रबंधन की भी उच्च स्तरीय जांच कराने की अपील की गई है। उच्च शिक्षा सचिव एस. भारतीदासन ने शिकायत को गंभीरता से लेते हुए शीघ्र जांच कराने और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का आश्वासन दिया है।

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