Sun, 12 Jul 2026
Logo

ब्रेकिंग

FIFA WC 2026 : सेमीफाइनल में पहुंची अर्जेंटीना और इंग्लैंड, Messi नहीं कर पाए गोल, बेलिंगम ने दिखाया करिश्मा

15वें दिन भूख हड़ताल जारी : जंतर-मंतर पर सोनम वांगचुक की तबीयत और बिगड़ी, 7.8 किलो वजन घटा

मछली चोरी की रंजिश में हत्या : पहले बाइक को मारी टक्कर, फिर पीट-पीटकर युवक को उतारा मौत के घाट, साथी ने भागकर बचाई जान

क्यों होता है पूजा में कपूर का प्रयोग? सिर्फ परंपरा नहीं, इसके पीछे छिपा है आध्यात्म…

मैंने… नही मैंने! मंच पर भिड़े भाजपा नेता और कांग्रेस विधायक; जानें क्यों फीका पड़ गया करोड़ों का कार्यक्रम

‘हमें गंदी नाली का कीड़ा कहा जाता है’, 35 KM पैदल चलकर CM से मिलने पहुंचे दलित छात्र

श्रद्धालुओं के दान का ये उपयोग? VIP की आवभगत में उड़ाए गए पैसे, BJP विधायक का भी नाम शामिल

सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में चंदा चोरी की जांच! कांग्रेस ने की डिमांड, ट्रस्ट और केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप

दिल्ली में अवैध निर्माण 72 घंटे में जमींदोज होगा; एलजी के कड़े रुख के बाद एक्शन में DDA, गठित की टीमें

मोदी सरकार का बड़ा कदम, लॉन्च होने वाला है देश का पहला इकोनॉमिक बैरोमीटर; अर्थव्यवस्था को मिलेगी रफ्तार

सूचना

रायपुर : रायपुर : नारायणपाल का प्राचीन विष्णु मंदिर : इंद्रावती और नारंगी नदियों के संगम पर बसी बस्तर की अद्भुत धरोहर

Abhyuday Bharat News / Sat, May 30, 2026 / Post views : 126

Share:

छत्तीसगढ़ का बस्तर अंचल अपनी प्राकृतिक सुंदरता, जनजातीय संस्कृति और ऐतिहासिक धरोहरों के लिए देशभर में विशेष पहचान रखता है। घने जंगलों, जलप्रपातों और प्राचीन मंदिरों से समृद्ध यह क्षेत्र हर वर्ष बड़ी संख्या में पर्यटकों को आकर्षित करता है। इन्हीं धरोहरों में एक महत्वपूर्ण स्थल है नारायणपाल विष्णु मंदिर, जो बस्तर जिले के नारायणपाल गांव में इंद्रावती और नारंगी नदियों के संगम के समीप स्थित है। यह मंदिर न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि भारतीय स्थापत्य कला, इतिहास और सांस्कृतिक विरासत का भी अनूठा उदाहरण है।

11वीं शताब्दी में निर्मित, चालुक्य और नागर शैली का संगम

यह मंदिर लगभग 11वीं शताब्दी में निर्मित हुआ माना जाता हैस बस्तर क्षेत्र का यह एकमात्र प्राचीन विष्णु मंदिर है, जिसकी वास्तुकला में चालुक्य और नागर शैली का अद्भुत संगम दिखाई देता है। मंदिर की ऊंची शिखर शैली, अष्टकोणीय मंडप, सुंदर स्तंभ और पत्थरों पर की गई बारीक नक्काशी आज भी लोगों को आकर्षित करती है। मंदिर की दीवारों और प्रवेश द्वार पर उकेरी गई कलाकृतियां उस समय के शिल्पकारों की उत्कृष्ट कला-कौशल को दर्शाती हैं। इतिहासकार इस मंदिर को खजुराहो कालीन स्थापत्य परंपरा का समकालीन उदाहरण भी मानते हैं।

प्रकृति, आस्था और इतिहास का अद्भुत संगम

मंदिर का वातावरण शांत और आध्यात्मिक अनुभूति से भरपूर है। इंद्रावती और नारंगी नदियों का संगम इस स्थल की सुंदरता को और मनमोहक बना देता है। सुबह और शाम के समय मंदिर परिसर और नदी किनारे का दृश्य पर्यटकों को विशेष रूप से आकर्षित करता है। यहां प्रकृति, आस्था और इतिहास का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। यही कारण है कि धार्मिक श्रद्धालुओं के साथ-साथ इतिहासकार, वास्तुकला प्रेमी और फोटोग्राफी के शौकीन पर्यटक भी बड़ी संख्या में यहां पहुंचते हैं।

चित्रकोट जलप्रपात के निकट, पर्यटन का बढ़ता महत्व

चित्रकोट जलप्रपात के निकट स्थित होने के कारण नारायणपाल मंदिर का पर्यटन महत्व और बढ़ जाता है। चित्रकोट जलप्रपात घूमने आने वाले अधिकांश पर्यटक इस ऐतिहासिक मंदिर का भी भ्रमण करते हैं। बरसात और सर्दियों के मौसम में यहां का प्राकृतिक सौंदर्य चरम पर होता है। चारों ओर फैली हरियाली, बहती इंद्रावती नदी और प्राचीन मंदिर की भव्यता इस स्थान को अत्यंत आकर्षक बना देती है।

यहां आने वाले पर्यटक प्राचीन भारतीय स्थापत्य कला को करीब से देख सकते हैं और बस्तर की सांस्कृतिक विरासत व प्राकृतिक सौंदर्य का अनुभव भी कर सकते हैं। मंदिर परिसर फोटोग्राफी के लिए भी उपयुक्त स्थान माना जाता है।

अक्टूबर से फरवरी तक का समय सबसे उपयुक्त

अक्टूबर से फरवरी तक का समय यहां घूमने के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है। इस दौरान मौसम सुहावना रहता है और आसपास के प्राकृतिक स्थल भी बेहद आकर्षक दिखाई देते हैं। बरसात के मौसम में इंद्रावती नदी और आसपास की हरियाली का दृश्य मनमोहक होता है।

बस्तर की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण प्रतीक

नारायणपाल का प्राचीन विष्णु मंदिर केवल धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि बस्तर की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण प्रतीक है। सदियों पुरानी यह धरोहर आज भी भारतीय कला, संस्कृति और स्थापत्य परंपरा की गौरवशाली कहानी को जीवंत रूप में प्रस्तुत करती है।

कैसे पहुंचे नारायणपाल मंदिर

नारायणपाल मंदिर तक पहुंचना आसान है। यह स्थल जगदलपुर से लगभग 35 से 40 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है और सड़क मार्ग से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है। जगदलपुर से टैक्सी, निजी वाहन अथवा स्थानीय परिवहन के माध्यम से यहां पहुंचा जा सकता है। निकटतम रेलवे स्टेशन जगदलपुर रेलवे स्टेशन है, जबकि निकटतम हवाई अड्डा जगदलपुर एयरपोर्ट है, जहां से सड़क मार्ग द्वारा मंदिर तक पहुंचा जा सकता है।

Tags :

#CG NEWS

विज्ञापन

Advertisement
Advertisement

विज्ञापन

Advertisement

जरूरी खबरें

विज्ञापन

Advertisement
Advertisement

विज्ञापन

Advertisement

विज्ञापन

Advertisement

विज्ञापन

Advertisement

विज्ञापन

Advertisement

Related Posts