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ABN NEWS :- देश दुनिया : 'पाकिस्तान ने लूट ली महफिल!'...अमेरिका-ईरान सीजफायर कराकर बन गया 'विश्वगुरु'? क्या पीछे रह गया भारत

Abhyuday Bharat News / Wed, Apr 8, 2026 / Post views : 273

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अमेरिका-ईरान के बीच सीजफायर का ऐलान हो गया है। इस सीजफायर को कराने में बड़ी भूमिका पाकिस्तान की मानी जा रही है। इस पूरे मामले में पर्दे के पीछे का क्या खेल है, एक्सपर्ट से समझते हैं।

नई दिल्ली: अमेरिका-ईरान के बीच दो हफ्तों का युद्धविराम हो गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसका ऐलान करते हुए इसे 'विश्व शांति के लिए बड़ा दिन' करार दिया है। अमेरिका और ईरान दोनों ने इसके पीछे पाकिस्तान की कोशिशों की तारीफ की है। सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक में पाकिस्तान की वाहवाही हो रही है। मगर, भारत में आतंक फैलाने वाला पाकिस्तान क्या वाकई में शांति का सूत्रधार है, या इसके पीछे कोई अलग ही खेल चल रहा है। यह भी सवाल उठ रहा है कि भारत क्या इस मामले में कूटनीतिक तौर पर पीछे रह गया है। वेडनेसडे बिग टिकट में इन सवालों के जवाब एक्सपर्ट से जानते हैं।

पाकिस्तान ने सीजफायर कराकर बढ़ा लिया अपना कद

डिफेंस एनालिस्ट लेफ्टिनेंट कर्नल (रि.) जेएस सोढ़ी के अनुसार, अमेरिका-ईरान सीजफायर में पाकिस्तान की भूमिका वाकई में काबिले-तारीफ है। अब जो भी इस मामले में पाकिस्तान ने बढ़त बना ली है। मध्यस्थता वही करा सकता है, जिस पर दोनों पक्षों को भरोसा है। ऐसे में दुनिया में पाकिस्तान का कद बढ़ा है। खासतौर पर मुस्लिम दुनिया में। इस सीजफायर के जरिये पाकिस्तान पूरी महफिल लूट ली है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बाकायदा पाकिस्तान का नाम लिया है, जो बड़ी बात है।

पाकिस्तान ने सीजफायर कराया, मगर विश्वगुरु नहीं

डिफेंस एनालिस्ट जेएस सोढ़ी कहते हैं कि पाकिस्तान ने भले ही सीजफायर करा दिया हो, मगर वह विश्वगुरु नहीं बन सकता है। क्योंकि पाकिस्तान की आर्थिक ताकत भारत जैसी नहीं है। भारत ने जापान को पछाड़कर दुनिया की चौथी बड़ी अर्थव्यवस्था का खिताब पिछले साल ही हासिल कर लिया था। अब वह जर्मनी को पीछे छोड़कर तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की राह पर है।

यह भारत के लिए है खतरे की घंटी

  • डिफेंस एनालिस्ट जेएस सोढ़ी के अनुसार, पाकिस्तान की मध्यस्थता से अमेरिका-ईरान के बीच सीजफायर हुआ है। अब इससे पाकिस्तान की दुनिया की तीनों महाशक्तियों के बीच पैठ बढ़ी है। अमेरिका, चीन और रूस तीनों से उसके ताल्लुकात गहरे हुए हैं।

  • इस क्षेत्र में पाकिस्तान का कद बढ़ने से भारत के लिए खतरे की घंटी है। क्योंकि पाकिस्तान हमेशा से भारत को नुकसान पहुंचाता रहा है।

  • भारत में आतंकवाद फैलाता रहा है। ऐसे में वैश्विक मंचों पर पाकिस्तान के खिलाफ आतंकरोधी गठजोड़ बनाने की भारत की कोशिश कमजोर होगी। इन ताकतों के चलते पाकिस्तान अब खुलकर भारत विरोधी गतिविधियों को अंजाम दे सकता है।

  • जहां तक भारत के मध्यस्थता कराने की बात है, तो भारत के अमेरिका-इजरायल और ईरान तीनों से अच्छे संबंध हैं, मगर भारत ने शुरू से इंतजार करो और देखो की नीति का पालन किया है। भारत एक-एक कदम फूंककर आगे बढ़ता है।


2030 के बाद पाकिस्तान के साथ युद्ध छेड़ सकता है चीन

जेएस सोढ़ी के अनुसार, पाकिस्तान की कूटनीतिक मजबूती बए़ने से भारत की एक और चिंता यह हो सकती है कि पाकिस्तान के साथ मिलकर चीन 2030 के बाद भारत के खिलाफ युद्ध छेड़ सकता है, जैसा कि ग्लोबल टाइम्स के लेख से चीन की भारत विरोधी रणनीतियों के खुलासे से होता है।

पाकिस्तान को बेवजह का हीरो बना रहा अमेरिका!

  • सोशल मीडिया पर एक यूजर ने कहा है कि यह बेहद मजाकिया है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी डेडलाइन खत्म होने से पहले दो हफ्ते का सीजफायर करने के पीछे ये दलील दी है कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने इसके लिए निवेदन किया था।

  • पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ ने सोशल मीडिया एक्स पर पोस्ट में सीजफायर के बारे में बताया। मगर, उनके पोस्ट पर ही बवाल हो गया। एक्स पर कई यूजर यह कहने लगे कि शरीफ ने जिस पोस्ट पर युद्ध रोकने की अपील की थी, उसका शुरुआती ड्रॉफ्ट अमेरिका या इजरायल ने तैयार किया था।

  • कयास लगाए जाने लगे कि यह मैसेज शहबाज की टीम की तरफ से नहीं, बल्कि बाहर से आया ड्राफ्टेड मैसेज है। दरअसल, किसी देश के पीएम की टीम ड्राफ्ट मैसेज में अपने देश का नाम नहीं लिखेगी। इसे 'ड्राफ्ट: पीएम का संदेश' के रूप में लिखा जा सकता है। सोशल मीडिया एक्स पर-Draft-Pakistan’s PM Message on X' ट्रेंड कर रहा है।

भारत या तुर्की को अमेरिका ने क्यों नहीं चुना

वहीं, एक और यूजर ने कहा है कि अगर अमेरिका ने तुर्की, भारत, कतर और सऊदी अरब के बजाय पाकिस्तान को मध्यस्थ चुना है तो इसके पीछे कुछ बड़ी वजहें हैं-

  • तुर्की का क्षेत्र में काफी प्रभाव है और उसकी कूटनीति बेहद एक्टिव है।

  • भारत की वैश्विक साख काफी ज्यादा है और यह रणनीतिक रूप से स्वायत्त देश है।

  • कतर को पहले से ही मध्यस्थता निभाने का अच्छा-खासा अनुभव रहा है।

  • सऊदी अरब की वित्तीय ताकत काफी और क्षेत्र में उसका भी अच्छा-खासा प्रभाव है।


पाकिस्तान को चुनने के पीछे की बड़ी वजह समझिए

अमेरिका ने मध्यस्थता के लिए पाकिस्तान को चुना। इसके पीछे की कुछ बड़ी वजहें ये भी हो सकती हैं-

  • पाकिस्तान का बेहद कम विदेशी विनिमय रिजर्व होना।

  • दिवालिया होने से बचने के लिए इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड (IMF) से बेलआउट पैकेज मिलना।

  • चीन और खाड़ी देशों पर वित्तीय निर्भरता ज्यादा होना।

  • जब किसी देश की अर्थव्यवस्था बाहरी सपोर्ट पर टिकी होती है तो उसकी विदेश नीति भी सीमित होती है।

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# International News

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