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कटनी (ढीमरखेड़ा)। मध्य प्रदेश में एक तरफ सरकार ‘लाडली बहना योजना’ का हर महीने ढिंढोरा पीट रही है, वहीं दूसरी तरफ सूबे के बुजुर्ग पाई-पाई को मोहताज हैं। कटनी जिले के ढीमरखेड़ा जनपद पंचायत से विकास के दावों की पोल खोलती एक बेहद शर्मनाक खबर सामने आई है। यहां पिछले तीन महीनों से बुजुर्गों को उनकी सामाजिक सुरक्षा पेंशन नहीं मिली है। शासन और प्रशासन की इस बेरुखी से नाराज बुजुर्गों ने अब सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए सीधे मुख्यमंत्री और कलेक्टर (DM) से गुहार लगाई है।
ढीमरखेड़ा जनपद पंचायत के अंतर्गत आने वाले तकरीबन 200 गांवों के हजारों बुजुर्ग इस समय गंभीर आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं। बुजुर्गों का कहना है कि बीते तीन महीनों से उनके खातों में पेंशन की एक चवन्नी तक नहीं आई है, जिससे दवा-पानी और रोजमर्रा के खर्चों के लिए उन्हें दूसरों के आगे हाथ फैलाना पड़ रहा है।
बुजुर्गों ने रोष जताते हुए कहा कि विधानसभा चुनाव के समय सरकार ने पेंशन बढ़ाकर 1000 करने की बड़ी-बड़ी घोषणाएं की थीं। लेकिन हकीकत यह है कि जो महज 600 मिल रहे थे, सरकार वो भी समय पर देने में नाकाम साबित हो रही है।
पेंशन न मिलने से आक्रोशित बुजुर्गों ने शासन-प्रशासन के सौतेले व्यवहार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। बुजुर्गों का कहना है कि सरकार ‘लाडली बहना योजना’ की किश्त हर महीने बिना चूके खातों में डाल रही है और उसका जोर-शोर से प्रचार-प्रसार भी किया जा रहा है।
ठीक उसी प्रकार बुजुर्गों की पेंशन भी हर महीने तय समय पर उपलब्ध करवाई जाए। बुजुर्गों ने मांग की है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और कटनी कलेक्टर इस संवेदनशील मामले को तत्काल संज्ञान में लें और हमारी समस्या का स्थाई निदान करवाएं।
इस पूरे महा-लापरवाही और गंभीर मामले पर जब स्थानीय प्रशासन से जवाब मांगा गया, तो सिस्टम की लाचारी सामने आ गई। ढीमरखेड़ा के समग्र सुरक्षा अधिकारी अनिल कौल ने साफ तौर पर स्वीकार किया कि शासन स्तर से ही पिछले तीन माह से पेंशन की राशि उपलब्ध नहीं कराई गई है। हालांकि, वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा आश्वासन दिया जा रहा है कि जल्द से जल्द बजट जारी कर बुजुर्गों की पेंशन का भुगतान करवा दिया जाएगा।
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