Sun, 12 Jul 2026
Logo

ब्रेकिंग

FIFA WC 2026 : सेमीफाइनल में पहुंची अर्जेंटीना और इंग्लैंड, Messi नहीं कर पाए गोल, बेलिंगम ने दिखाया करिश्मा

15वें दिन भूख हड़ताल जारी : जंतर-मंतर पर सोनम वांगचुक की तबीयत और बिगड़ी, 7.8 किलो वजन घटा

मछली चोरी की रंजिश में हत्या : पहले बाइक को मारी टक्कर, फिर पीट-पीटकर युवक को उतारा मौत के घाट, साथी ने भागकर बचाई जान

क्यों होता है पूजा में कपूर का प्रयोग? सिर्फ परंपरा नहीं, इसके पीछे छिपा है आध्यात्म…

मैंने… नही मैंने! मंच पर भिड़े भाजपा नेता और कांग्रेस विधायक; जानें क्यों फीका पड़ गया करोड़ों का कार्यक्रम

‘हमें गंदी नाली का कीड़ा कहा जाता है’, 35 KM पैदल चलकर CM से मिलने पहुंचे दलित छात्र

श्रद्धालुओं के दान का ये उपयोग? VIP की आवभगत में उड़ाए गए पैसे, BJP विधायक का भी नाम शामिल

सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में चंदा चोरी की जांच! कांग्रेस ने की डिमांड, ट्रस्ट और केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप

दिल्ली में अवैध निर्माण 72 घंटे में जमींदोज होगा; एलजी के कड़े रुख के बाद एक्शन में DDA, गठित की टीमें

मोदी सरकार का बड़ा कदम, लॉन्च होने वाला है देश का पहला इकोनॉमिक बैरोमीटर; अर्थव्यवस्था को मिलेगी रफ्तार

सूचना

असम :- गुवाहाटी न्यूज़ : Assam Election Results 2026: असम में तो गजब हो गया...पूरे विपक्ष में मुसलमानों को बैठा दिया

Abhyuday Bharat News / Tue, May 5, 2026 / Post views : 113

Share:

असम विधानसभा चुनाव में भगवा रंग और गहरा गया है। इस बार के चुनाव में कई गजब की बातें हुई हैं। बीजेपी को जहां बोनस मिला है तो वहीं कांग्रेस और एआईयूडीएफ को हाशिए पर पहुंचा दिया।

गुवाहाटी: असम विधानसभा चुनाव 2026 बीजेपी के लिए बोनस साबित हुआ है। वोटरों ने विपक्ष में करीब-करीब मुसलमानों को बैठा दिया है। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा शुरू से ही कहते आ रहे थे कि परिसीमन से यह सुनिश्चित होगा कि स्वदेशी समुदाय 126 सीटों में से 100 से अधिक सीटों पर कब्जा बनाए रखें। वहीं, कांग्रेस ने सिकुड़े हुए मुस्लिम बहुल क्षेत्र में अपनी स्थिति मजबूत की, जिसका खामियाजा इत्र कारोबारी बदरुद्दीन अजमल की एआईयूडीएफ को भुगतना पड़ा। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा-यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि कांग्रेस के एक विधायक को छोड़कर बाकी सभी इस्लाम धर्म का पालन करते हैं। मैं यह नहीं कह रहा हूं कि हिंदू या मुस्लिम जीते हैं। मैं केवल आंकड़े दे रहा हूं और यह आपका विश्लेषण है।

परिसीमन ने कांग्रेस और AIUDF को आमने-सामने खड़ा कर दिया

अभ्युदय भारत न्यूज़ की एक रिपोर्ट के अनुसार, 2023 में निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं के पुनर्निर्धारण के बाद असम के पहले विधानसभा चुनाव में परिसीमन एक अप्रत्याशित फैक्टर साबित हुआ। परिसीमन के कारण मुस्लिम बहुल सीटों की संख्या 35 से घटकर 22 हो गई, जिससे बीजेपी के दो मुख्य प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस और एआईयूडीएफ अब एक दूसरे के खिलाफ अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे हैं।

मुस्लिम विधायकों की संख्या में आ गई कमी

हालांकि विधानसभा सीटों की संख्या 126 ही रही। उसमें कोई बदलाव नहीं आया। मगर, परिसीमन ने प्रतिनिधित्व के समीकरण को बदल दिया, जिससे मुस्लिम विधायकों की संख्या 25 से कम रही, जबकि स्वदेशी समुदाय 90 सीटों के मुकाबले 103 सीटों पर निर्णायक भूमिका निभाने लगे।

यूं बिगड़ा विपक्ष का संतुलन

राज्य की नई चुनावी भौगोलिक स्थिति ने चुनाव से पहले ही विपक्ष के संतुलन को बिगाड़ दिया था। कई मौजूदा AIUDF विधायकों ने पाला बदलकर NDA की घटक पार्टी AGP में शामिल हो गए, ताकि पहले से कम टिकटों की होड़ में उन्हें कोई नुकसान न हो। BJP के लिए यह एक रणनीतिक कदम था, जिससे उन सीटों पर NDA की संभावनाएं बढ़ गईं जहां मुस्लिम वोटर्स निर्णायक भूमिका निभाते हैं। हालांकि, सब कुछ योजना के मुताबिक नहीं हुआ, लेकिन AIUDF को सिर्फ दो सीटें मिलना BJP की चाहत के मुताबिक ही था।

बंगाली मूल के मुस्लिम वोटर्स का दबदबा घटा

2023 के परिसीमन अभ्यास ने न केवल उन निर्वाचन क्षेत्रों का महत्व कम किया जहां बंगाली मूल के मुस्लिम मतदाताओं का लंबे समय से दबदबा रहा था, बल्कि अनुसूचित जनजातियों के लिए आरक्षित सीटों की संख्या 16 से बढ़ाकर 19 कर दी। अनुसूचित जाति की सीटें एक बढ़कर नौ हो गईं। पुनर्निर्धारित सीटों में निचले, मध्य और दक्षिणी असम के कांग्रेस के गढ़ भी शामिल थे, जहां मुस्लिम वोटर्स की संख्या अधिक है।

1985 के असम समझौते में क्या था

असम की राजनीति लंबे समय से बांग्लादेश से अवैध अप्रवासन से प्रभावित रही है। एक जनआंदोलन के बाद 1985 का असम समझौते ने नागरिकता के लिए 25 मार्च, 1971 की तिथि निर्धारित की थी। लेकिन इसके बाद भी अवैध अप्रवासन जारी रहने के आरोप लगते रहे हैं। भाजपा लगातार यह तर्क देती रही है कि राज्य की राजनीतिक दिशा प्रवासी मुस्लिम आबादी के बजाय स्वदेशी समुदायों द्वारा निर्धारित की जानी चाहिए।

असम में वोटिंग पैटर्न गजब का है

असम में अल्पसंख्यकों के वोटिंग पैटर्न ऐतिहासिक रूप से सत्ताधारी पार्टी के पक्ष में रहे हैं, जब तक कि भाजपा ने 2016 में अपना पहला मंत्रिमंडल नहीं बनाया। परिसीमन के बाद यह स्थिति और भी बदल गई है। बाकी मुस्लिम बहुल सीटों के मतदाता भाजपा के शासन में अपने हितों की सुरक्षा को लेकर चिंताओं के बीच कांग्रेस का समर्थन कर रहे हैं।

असम में विपक्ष पूरी तरह से मुस्लिम

असम विधानसभा की 126 सीटोंमें विपक्ष लगभग पूरी तरह से मुस्लिम है, जिसमें गैर-एनडीए दलों के 24 निर्वाचित विधायकों में से 22 मुस्लिम समुदाय से हैं। कांग्रेस ने 19 सीटें जीतीं, जो मुस्लिम विधायकों का सबसे बड़ा गुट है (18)। एआईयूडीएफ के पास दो सीटें हैं और रायजोर दल और तृणमूल कांग्रेस के पास एक-एक सीट है।


विपक्ष में केवल दो हिंदू चेहरे

असम विधानसभा में विपक्ष में केवल दो हिंदू चेहरे हैं। ये हैं रायजोर दल के प्रमुख अखिल गोगोई, जिन्होंने सिबसागर सीट बरकरार रखी और कांग्रेस के जॉयप्रकाश दास, जिन्होंने नाओबोइचा सीट से जीत हासिल की, जहां मुस्लिम मतदाताओं की अच्छी खासी संख्या है। कांग्रेस के सभी हिंदू मौजूदा विधायक अपनी सीटें हार गए, जो कई मायनों में एक असामान्य चुनाव रहा है।

Tags :

#breking news

विज्ञापन

Advertisement
Advertisement

विज्ञापन

Advertisement

जरूरी खबरें

विज्ञापन

Advertisement
Advertisement

विज्ञापन

Advertisement

विज्ञापन

Advertisement

विज्ञापन

Advertisement

विज्ञापन

Advertisement

Related Posts