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Mp news : जिंदगी की जंग हारी मां, लेकिन ममता जीत गई: बरगी में मां की पकड़ बच्चे से नहीं छूटी, शव देखकर बचावकर्मी हैरान!

Abhyuday Bharat News / Sat, May 2, 2026 / Post views : 268

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बरगी डैम हादसे के बाद मां और बेटे का दिल दहला देने वाला दृश्य सामने आया, जहां मौत के बाद भी मां अपने मासूम बेटे को सीने से लगाए रही। बेटा भी मां के सीने पर सिर रखकर हमेशा के लिए सो गया। बरगी की त्रासदी से आई यह तस्वीर लोगों को काफी भावुक कर रही है। मौत के बाद भी मां की ममता जीत गई। 

लाइफ जैकेट पहने एक मां… और उसके सीने से लिपटा उसका मासूम बेटा। जब दोनों के शव बरगी डैम के पानी से बाहर निकाले गए, तो यह दृश्य देखकर लोगों की रूह कांप उठी। यह मंजर उस दर्दनाक हादसे के बाद का था, जिसने हर किसी को भीतर तक झकझोर दिया।

मौके पर मौजूद लोग हों या सोशल मीडिया पर इस तस्वीर को देखने वाले, हर एक शख्स की आंखें नम हो गईं यह भावुक दृश्य देखकर। ये सिर्फ एक हादसा नहीं था, बल्कि ममता की वह आखिरी झलक थी, जो मौत के बाद भी जिंदा रही। मां आखिरी सांस तक उस भयावह त्रासदी से जूझती रही, लेकिन अपने बच्चे को सीने से लगाए रखा। मौत भी उसके आंचल से मासूम को अलग नहीं कर सकी। 

ये तस्वीर सिर्फ एक हादसे की कहानी नहीं कहती, बल्कि उस अटूट ममता की गवाही देती है, जो जीवन के पार भी अपने बच्चे को थामे रहती है। राहत-बचाव कार्य में जुटी टीम का वीडियो सामने आया है। जिसमें चार से पांच सदस्यों की टीम सुबह मां व बेटे के शव को बरगी डैम से बाहर निकाल रहे हैं। वीडियो में आप देख सकते हैं कि इतने भयावह पानी और तेज लहरों के

 बीच बचाव कार्य करना चुनौती पूर्ण बना हुआ है। लेकिन इसके बाद टीमें बचाव की हर एक संभव कोशिश करने में जुटी हुई हैं।

शव निकालने वालों के पास भी शब्द कम पड़ गए 
सेना की तरफ से आए बचावकर्मी ने कहा कि क्रूज पलटकर डूब चुका था। अंदर जानें के बाद जहां से थोड़ी बहुत जगह मिली, वहां से अंदर जाकर शव ढूंढने की कोशिश की। दृश्यता भी काफी कम थी। आधे फीट की दूरी तक भी कुछ नहीं दिख रहा था। अंदर हमने जो मंजर देखा, उसे देखकर हैरान हो गए। महिला को बाहर निकालने की कोशिश की, तो बॉडी बाहर नहीं आ पा रही थी। हमने देखा तो पाया कि उसे सिमटकर एक बच्चा भी था। हम खींचने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन उस मां की पकड़ अपने बच्चे से छूट ही नहीं रही थी।

क्रूज नाव अचानक आए तेज तूफान के कारण पलट गई
 इस हादसे में नौ लोगों के शव मिल चुके हैं। जबकि 28 लोगों को बचा लिया गया है। वहीं, छह लोग अब भी लापता हैं। आज सुबह मिली जानकारी के अनुसार, क्रूज में कुल 43 लोग सवार थे। अधिकारियों के मुताबिक, गुरुवार शाम 29 यात्रियों और दो चालक दल के सदस्यों को लेकर जा रही क्रूज नाव अचानक आए तेज तूफान के कारण पलट गई। तेज हवाओं और ऊंची लहरों के बीच नाव संतुलन खो बैठी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, यात्रियों ने नाव किनारे लगाने की गुहार लगाई, लेकिन आवाज चालक दल तक नहीं पहुंच सकी और हादसा हो गया।

दो दशक पुराना है क्रूज
मध्य प्रदेश पर्यटन विभाग के अधिकारी योगेंद्र रिछारिया ने मीडिया को बताया कि इस क्रूज का निर्माण 2006 में किया गया था। इसमें 60 यात्रियों की बैठने की क्षमता है।  

बच्ची ने क्या बताया?
ज्यूलियस नामक यात्री ने बताया कि हम छह लोग सवार थे। वह अपनी पत्नी, बेटी, दामाद व नातिन व नाती के साथ क्रूज में सवार हुए थे। क्रूज यात्रा के दौरान सुरक्षा का कोई ध्यान नहीं रखा गया था। जब क्रूज डूबने लगा, तब यात्रियों को लाइफ सेविंग जैकेट दी गई। क्रूज के डूबने से पहले कई यात्री जैकेट तक नहीं पहन पाए थे। इस हादसे में उनकी पत्नी मधु की मौत हो गई। बेटी रीना व चार वर्षीय नाती लापता हैं। वो और दामाद व नातिन सिया सुरक्षित हैं। घटना होने पर तत्काल कोई रेस्क्यू ऑपरेशन प्रारंभ नहीं हुआ था। क्षेत्रीय लोगों ने मदद करते हुए रस्सी फेंककर उन सहित अन्य क्रूज यात्रियों को बाहर निकाला। हादसे में बची एक बच्ची ने बताया कि क्रूज में पानी भर गया था। सब भाग गए थे। मुझे मेरे पापा मिल गए थे तो मैंने उनका हाथ पकड़ लिया था। मेरी मम्मी और भाई नहीं मिल रहा। नाना मिल गए हैं, नानी की मौत हो गई है। 

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