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Abhyuday Bharat News / Wed, May 20, 2026 / Post views : 62


1. एंडोस्कोपिक अल्ट्रासाऊंड (Endoscopic Ultrasound (EUS)
2. एसोफागियल मनोमेट्री।(Esophageal Manometry)
3. कैप्सूल एंडोस्कोपी।(Capsule Endoscopy)
4. एडवांस्ड डायग्नोस्टिक एवं थैरेपीयूटिक एंडोस्कोपी। (Advanced Diagnostic & Therapeutic Endoscopy)
5. जी आई सर्जरी। (GI Surgery)
जैसी अत्याधुनिक तकनीकें शामिल हैं साथियों उन्होंने यह भी बताया कि अपोलो हॉस्पिटल बिलासपुर ऑफ मेडिकल गैस्ट्रोएंटरोलॉजी में डीआरएनबी प्रोग्राम आरंभ करने जा रहा है जिसके फल स्वरुप और अपोलो हॉस्पिटल बिलासपुर न केवल उपचार ही उपलब्ध कराएगा बल्कि भविष्य के मेडिकल गैस्ट्रोएंटरोलॉजी तैयार करने वाला ट्रेनिंग सेंटर भी बनेगा और पूरे मध्य भारत में विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता से हेल्थ केयर सिस्टम मजबूत होगा।
डॉक्टर देवेंद्र सिंह वरिष्ठ गैस्ट्रोएंटरोलॉजी अपोलो हॉस्पिटल बिलासपुर ने अस्पताल के आरंभ से लेकर अब तक के गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग के सफर की जानकारी देते हुए बताया कि अपोलो के आरंभ में कोलकाता से लेकर इस बिलासपुर शहर तक के बीच में कोई भी गैस्टोरेंटोलॉजिस्ट उपलब्ध नहीं था और आज की स्थिति यह है कि आज हमारे पास पूरा गैस्ट्रोएंटरोलॉजी कंप्रिहेंसिव केयर टीम उपलब्ध है साथ ही यह बताया कि विभाग में अब तक लगभग 122000 ओपीडी मरीजों 24000 इन पेशेंट्स का उपचार, लगभग 61000 के आसपास गैस्ट्रो प्रोसीजर्स किए जा चुके हैं। उन्होंने आगे बताते हुए कहा कि। अपोलो हॉस्पिटल बिलासपुर का गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग उत्तरी छत्तीसगढ़ के लगभग 14 जिलों मध्य प्रदेश के चार जिलों एवं उड़ीसा के तीन जिलों के मरीजों को स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध करा रहा है। गैस्ट्रो प्रोसीजर्स जैसे एंडोस्कोपी कोलोनोस्कोपी सिगमाडोस्कोपी फ्लोरोस्कॉपी फाइब्रोस्कैन लिवर बायोप्सी एवं इआरसीपी तथा स्क्लेरोथेरेपी की सुविधा पहले ही अपोलो हॉस्पिटल बिलासपुर में उपलब्ध थी और अब इनके साथ-साथ नई आधुनिक तकनीकी युक्त सुविधाओं का भी समावेश किया जा रहा है।
डॉ सीतेंदू पटेल गैस्ट्रोएंटरोलॉजी अपोलो हॉस्पिटल बिलासपुर ने बताया कि एंडोस्कोपिक अल्ट्रासाऊंड के माध्यम से भोजन नली, पेट, अग्नाशय, पित्ताशय एवं आसपास की संरचनाओं की अत्यंत सूक्ष्म जांच संभव हो पाती है। यह तकनीक अग्नाशय के कैंसर, पित्त नली की समस्याओं तथा पेट के अंदरूनी ट्यूमर के शुरुआती निदान में अत्यंत उपयोगी सिद्ध हो रही है।
इसी क्रम में डॉक्टर आकाश गर्ग उदर रोग विशेषज्ञ ने मेनोमेट्री के बारे में बताते हुए कहा कि एसोफागियल मेनोमेट्री जांच भोजन नली की कार्यप्रणाली को समझने में सहायक होती है। जिन मरीजों को निगलने में कठिनाई, सीने में जलन या लगातार एसिड रिफ्लक्स की समस्या रहती है, उनके लिए यह जांच अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है।
डॉ समर्थ शर्मा उदर रोग विशेषज्ञ ने कैप्सूल एंडोस्कोपी के बारे में बताया कि यह एक आधुनिक एवं सुविधाजनक तकनीक है, जिसमें मरीज को एक छोटे कैप्सूल के आकार का कैमरा निगलना होता है। यह कैप्सूल शरीर के अंदर जाकर छोटी आंत की तस्वीरें लेता है, जिससे ऐसी बीमारियों का भी पता लगाया जा सकता है जो सामान्य एंडोस्कोपी में दिखाई नहीं देतीं। यह बिना दर्द एवं बिना सर्जरी के होने वाली अत्यंत प्रभावी जांच पद्धति है।
डॉक्टर लाजपत अग्रवाल जी आई सर्जन अपोलो हॉस्पिटल बिलासपुर अस्पताल में नई आधुनिकतम मशीनों के समावेश पर जानकारी देते हुए कहा कि बीमारी के सटीक डायग्नोसिस सर्जरी में विशेष रूप से सहायक होगी।
अपोलो हॉस्पिटल बिलासपुर की विशेषज्ञ गैस्ट्रो केयर टीम एवं जी आई सर्जरी की संयुक्त विशेषज्ञता के माध्यम से मरीजों को एंडोस्कोपिक उपचार, जी आई सर्जरी, लिवर एवं पैंक्रियास रोगों का उन्नत उपचार तथा जटिल गैस्ट्रो सर्जरी जैसी सुविधाएँ एक ही स्थान पर उपलब्ध कराई जा रही हैं।
विशेषज्ञों ने लोगों से अपील की है कि वे संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद एवं समय पर भोजन की आदत अपनाएँ। हरी सब्जियाँ, फल, फाइबर युक्त भोजन और पर्याप्त पानी का सेवन पाचन तंत्र को स्वस्थ बनाए रखने में सहायक होता है। साथ ही धूम्रपान एवं शराब से दूरी बनाए रखना भी आवश्यक है।
यदि लगातार पेट दर्द, एसिडिटी, भूख में कमी, वजन घटना, निगलने में परेशानी, उल्टी या मल त्याग में अनियमितता जैसी समस्याएँ बनी रहें, तो तुरंत विशेषज्ञ चिकित्सकों से परामर्श लेना चाहिए। आधुनिक तकनीकों एवं अनुभवी विशेषज्ञों की सहायता से आज कई गंभीर बीमारियों का प्रारंभिक चरण में ही सफल निदान एवं उपचार संभव हो गया है।
स्वस्थ जीवनशैली, सही खानपान एवं समय पर जांच ही स्वस्थ पाचन तंत्र और बेहतर जीवन की कुंजी है।
डॉ अनिल कुमार गुप्ता, चिकित्सा अधीक्षक, अपोलो हॉस्पिटल बिलासपुर में धन्यवाद ज्ञापन किया।
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