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अदालत ने याचिका की सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि इस दावे में कोई ठोस आधार नहीं है। जजों की पीठ ने अपने फैसले में कहा, 'हमें उक्त तर्क के सार में कोई योग्यता नहीं मिली है और इसलिए, हमें नहीं लगता कि इस रिट याचिका को जनहित याचिका के रूप में बनाए रखना उचित होगा।'
यह याचिका एर्नाकुलम के रहने वाले आशिक नामक व्यक्ति द्वारा दायर की गई थी जिन्होंने खुद को एक सार्वजनिक उत्साही नागरिक बताया। याचिका में सवाल उठाया गया था कि बीसीसीआई द्वारा आयोजित फ्रेंचाइजी-आधारित ट्वेंटी-20 टूर्नामेंट के लिए आईपीएल नाम का उपयोग गलत है। याचिकाकर्ता का तर्क था कि हालांकि यह टूर्नामेंट कई सालों से आयोजित किया जा रहा है लेकिन उन्हें हाल ही में समझ आया कि यह एक आधिकारिक राष्ट्रीय क्रिकेट टूर्नामेंट नहीं है।
आईपीएल की शुरुआत साल 2008 में हुई थी और 28 मार्च से इसका 19वां सीजन शुरू होने जा रहा है। इस अदालती फैसले ने टूर्नामेंट के आयोजन पर मंडरा रहे संभावित कानूनी विवाद के बादलों को साफ कर दिया है। बीसीसीआई के लिए यह एक बड़ी राहत है क्योंकि टूर्नामेंट के नाम को लेकर उठ रहे सवालों पर अब विराम लग गया है।
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