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ज्योतिष शास्त्र में शनि ग्रह को सबसे प्रभाव शाली और न्यायप्रिय ग्रह माना है, लेकिन जैसे ही शनिदेव का नाम आता है, लोगों के मन में भय पैदा हो जाता है । इसकी वजह भी साफ है शनि को कर्मों का फल देने वाला न्यायाधीश कहते है। यानी व्यक्ति ने जीवन में जो भी अच्छे या बुरे कर्म किए हैं, उसका सीधा हिसाब शनिदेव ही देते हैं।
मान्यता है कि जिस जातक पर शनि की क्रूर दृष्टि पड़ती है, उसका जीवन अचाकन कठिनाइयों से भर जाता है। धन हानि, करियर में रुकावट, मानसिक तनाव, पारिवाकरि कलह और लगातार असफलता जैसी समस्याएं उसे घेर लेती है । यहां तक कहा जाता है कि शनि की कुदृष्टि इंसान को राजा से रंक बना सकती है।
ज्योतिष के अनुसार, जब व्यक्ति लोभ, क्रोध, मोह और अहंकार में आकर गलत रास्ते पर चलने लगता है, अन्याय और पाप का साथ देता है। तब शनिदेव उसे चेताने के लिए दंड देते हैं । साढ़ेसाती और ढैय्या जैसे समय इसी का संकेत माने जाते है, यह दंड सिर्फ सजा नहीं, बल्कि आत्म चिंतन और सुधार का अवसर भी होता है।
शनि की दृष्टि बेहद सूक्ष्म मानी जाती है। व्यक्ति चाहे अंधेरे में छिपकर ही क्यों न गलत काम करे, उससे कुछ भी छिपा नहीं रहत। यही कारण है कि शनिदेव को सबसे सख्त लेकिन न्याय प्रिय ग्रह कहा गया है।
हालांकि, शास्त्रों में यह भी बताया गया है कि शनिदेव को प्रसन्न करना असंभव नहीं है। यदि सही श्रद्धा और नियम से उपाय किए जाएं, तो उनकी कृपा भी उतनी ही जल्दी प्राप्त होती है ।
1. शनि के अशुभ प्रभाव को कम करने में बेहद कारगर माने जाते हैं। शनिवार के दिन व्रत रखना।
2. शनि मंदिर में सरसों का तेल चढ़ाना विशेष फलदायी माना जाता है।
3. शाम के समय पीपल के वृक्ष में जल अर्पित कर सरसों के तेल का दीपक जलाने से शनि दोषशांत होता है।
4. ओम प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः मंत्र का 108 बार जाप करने से मानसिक शांति मिलती है।
5. छाया दान को भी शनि शांति का शक्ति शाली उपाय मानाहै। इसके लिए एक पात्र में सरसों का तेल लेकर उसमें अपना चेहरा देख कर उस तेल का दान कर दिया जाता है। मान्यता है कि इससे नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है।
6. शनि देव को जरूरतमंदों की मदद करना उन्हें सबसे ज्यादा प्रिय है। शनिवार को काले तिल, उड़द दाल, कंबल, छाता या जूते दान करने से जीवन में सकारात्मक बलादव आते हैं।
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