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मनीष कश्यप की इस कहानी की शुरुआत होती है, जून महीने के लास्ट वीक में। मनीष कश्यप ने ऑटोमोबाइल कंपनी टोयोटा की इनोवा हाई क्रॉस गाड़ी खरीदी थी। ये कार E20 पेट्रोल पर चलने वाली गाड़ी है। मनीष कश्यप इस गाड़ी में सवार होते और E20 पेट्रोल डलवाकर अपने वीडियो शूट करने के लिए सफर पर निकल पकड़ते। करीब 8 से 10 दिन में मनीष कश्पय ने इस गाड़ी को 12 हजार किलोमीटर चलाया। अब बारी थी इनोवा हाई क्रॉस कार की पहले सर्विस की। बस यहीं से मनीष कश्यप की 'गिरफ्तारी का पटकथा' शुरू हो गई।
4 जुलाई को एक वीडियो पोस्ट किया गया। मनीष कश्यप इस वीडियो में बताया कि उनकी कार ब्रैकडाउन हो गई। गाड़ी के इंजन में आवाज आने लगी। सर्विस के दौरान E20 पेट्रोल कैपिबल कार से करीब चार लीटर पेट्रोल निकाला गया, जिसमें इथनॉल मिला हुआ था। मनीष कश्यप ने आरोप लगाते हुए दावा किया कि इथनॉल मिश्रित E20 पेट्रोल की वजह से उनकी कार खराब हुई है।
5 जुलाई कोमनीष कश्यप के आरोपों पर टोयोटा ने जवाबदिया। टोयटा ने कहा कि इनोवा हाइक्रॉस E20 पेट्रोल के लिए डिजाइन, टेस्टेड और सर्टिफाइड की गई है। इसमें E20 पेट्रोल से कोई खराबी नहीं आ सकती। कंपनी ने कहा कि गाड़ी में समस्या मिलावटी तेल की वजह से आ सकती है।
इसके बाद मनीष कश्यम ने अपनी इनोवा हाई क्रॉस को बेचकर डीजल पर चलने वाली गाड़ी खरीद ली और फिर अग्रेसिव होते हुए कई पेट्रोल पंप और गाड़ियों को लेकर वीडियो बनाते हुए सरकार और केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। इसके बाद केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने उनके आरोपों को झूठा करार दे दिया। गडकरी ने कहा कि टोयटा कंपनी की ओर से की गई जांच में मनीष कश्यप के दावे झूठे पाए गए हैं।
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