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छत्तीसगढ़ न्यूज़ : हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, सरकारी जमीन से अवैध कब्जाधारी को हटाने से पहले नोटिस देना जरूरी

Abhyuday Bharat News / Fri, Jul 10, 2026 / Post views : 249

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बिलासपुर। हाईकोर्ट ने अपने अहम फैसले में कहा है कि सरकारी या रेलवे की जमीन से किसी भी अवैध कब्जाधारी को हटाने से पहले उसे कानून के तहत स्पष्ट कारणों के साथ नोटिस देना जरूरी है। इसके साथ ही कोर्ट ने दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे द्वारा जिला कोर्ट के फैसले के खिलाफ दायर रिट याचिका को खारिज कर दिया।

दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे ने बिलासपुर के स्थानीय बुधवारी बाजार निवासी को रेलवे की जमीन पर अवैध कब्जाधारी मानते हुए लोक परिसर अधिनियम, 1971 के तहत बेदखली का आदेश जारी किया था। इस आदेश के खिलाफ जिला कोर्ट में अपील दायर की गई। 15 मई 2026 को जिला कोर्ट ने कब्जाधारी की अपील को स्वीकार करते हुए रेलवे के बेदखली आदेश को रद्द कर मामले को वापस सक्षम अधिकारी के पास भेज दिया था।

जिला कोर्ट ने निर्देश दिया था कि रेलवे अधिनियम की धारा 4 के तहत उचित और स्पष्ट नोटिस जारी करे और कानून के अनुसार नए सिरे से मामले में फैसला ले। जिला कोर्ट के फैसले को रेलवे ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। रेलवे की ओर से पैरवी करते हुए केंद्र सरकार के अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल रमाकांत मिश्रा ने अदालत में दलील दी कि जिला अदालत का आदेश पूरी तरह त्रुटिपूर्ण है।

उन्होंने तर्क दिया कि कब्जाधारी को धारा 4 के तहत बकायदा नोटिस तामील कराया गया था, लेकिन पर्याप्त अवसर मिलने के बावजूद उसने अपने बचाव में कोई सबूत पेश नहीं किया। रेलवे का कहना था कि वह व्यक्ति आज भी अवैध कब्जे में है, और अदालत द्वारा मामले को दोबारा वापस भेजने से कार्यवाही में अनावश्यक देरी होगी।

हाईकोर्ट ने मामले के रिकॉर्ड और जिला अदालत के आदेश का अध्ययन करने के बाद रेलवे की दलीलों को अमान्य कर दिया। कोर्ट ने पाया कि जिला कोर्ट ने रिकॉर्ड की विस्तृत जांच के बाद रेलवे द्वारा जारी शुरुआती नोटिस को कानूनन गलत पाया था, क्योंकि उसमें उन आधारों या कारणों का कोई उल्लेख नहीं था, जिसके तहत बेदखली की जानी थी।

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि भले ही संबंधित कोई सबूत न दे पाया हो, लेकिन प्राकृतिक न्याय का यह मूल सिद्धांत है कि किसी के खिलाफ दंडात्मक आदेश पारित करने से पहले उसे एक वैध और स्पष्ट कारणों वाला नोटिस दिया जाना जरूरी है।

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