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नए मुख्यमंत्री का नया मंत्रिमंडल होगा, जिसमें कई नए चेहरे देखने को मिल सकते हैं। इसके साथ-साथ नए नेतृत्व की पसंद के मुताबिक प्रशासन में भी फेरबदल निश्चित होगा। चर्चा यह भी है कि नीतीश कुमार खुद तो केंद्र में जा ही रहे हैं, साथ में बिहार के अपने विश्वस्त अफसरों को भी प्रतिनियुक्ति पर दिल्ली ले जा रहे हैं।
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के 9 अप्रैल को राज्यसभा सांसद की शपथ लेने की संभावना जताई जा रही है। इसके साथ यह भी चर्चा है कि 14 अप्रैल या इसके आसपास बिहार के नए मुख्यमंत्री और उनका नया मंत्रिमंडल शपथ ले सकता है। यानी एक अप्रैल से नया वित्तीय वर्ष शुरू होगा और इसके साथ बिहार के राजनीतिक और प्रशासनिक परिदृश्य में बदलाव का सिलसिला भी शुरू होगा।
जब बिहार में एनडीए की, बहुत संभव बीजेपी के मुख्यमंत्री के नेतृत्व वाली नई सरकार आएगी तो राज्य में प्रशासनिक फेरबदल भी होगा। नई सरकार अपनी पसंद और प्राथमिकताओं के अनुसार आईएएस, आईपीएस अधिकारियों की तैनाती करेगी।
इसके साथ-साथ बिहार के प्रशासनिक जगत में यह चर्चा भी चल रही है कि नीतीश कुमार खुद तो राज्यसभा में जा रहे हैं, अपने साथ बिहार के अपने भरोसेमंद कुछ चुनिंदा अधिकारियों को भी डेपुटेशन पर केंद्र में ले जा रहे हैं। सवाल है कि अपने विश्वस्त अधिकारियों को दिल्ली ले जाने के पीछे नीतीश का क्या उद्देश्य हो सकता है?
सांसदों के बजाय मंत्रियों को अपने खास अधिकारियों को साथ में रखने की ज्यादा जरूरत होती है। माना जा सकता है कि नीतीश कुमार दिल्ली भले ही राज्यसभा सांसद के रूप में जा रहे हैं, लेकिन उनकी भूमिका सिर्फ सांसद तक ही सीमित नहीं रहने वाली है। संभव है कि उन्हें निकट भविष्य में केंद्रीय मंत्री भी बनाया जाए। ऐसे में उन्हें अपनी रीति-नीति के अनुसार काम के लिए अपने विश्वस्त अधिकारियों की जरूरत होगी।
वैसे भी नीतीश कुमार का सहज ही मुख्यमंत्री पद छोड़कर राज्यसभा में जाना इतना सामान्य नहीं हो सकता जितना दिखाई दे रहा है। आने वाले समय में स्पष्ट हो जाएगा कि नीतीश कुमार के केंद्र में जाने का मतलब क्या था ?
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