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Abhyuday Bharat News / Fri, Jun 26, 2026 / Post views : 1
इंदौर। मध्य प्रदेश की आर्थिक और एजुकेशन राजधानी कहा जाने वाला इंदौर शहर एक ही दिन में तीन-तीन आत्महत्याओं की घटनाओं से दहल उठा है। शहर के अलग-अलग थाना क्षेत्रों में एक लॉ स्टूडेंट, एक इंजीनियरिंग के छात्र और एक ऑनलाइन कियोस्क संचालक ने फांसी लगाकर अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली। लगातार सामने आ रहे इन मामलों ने मानसिक तनाव और अवसाद को लेकर पूरे शहर में गहरी चिंता पैदा कर दी है।
पलासिया थाना इलाके में रह रहे लॉ (कानून) के छात्र आदर्श सोलंकी ने अज्ञात कारणों के चलते फाँसी लगाकर आत्महत्या कर ली। आदर्श कानून की पढ़ाई कर रहा था, लेकिन उसने यह आत्मघाती कदम क्यों उठाया, इसका खुलासा अभी नहीं हो सका है।
पढ़ाई और एजुकेशन लोन का दबाव
दूसरी दुखद घटना हीरानगर थाना क्षेत्र की है, जहां इंजीनियरिंग के छात्र राजकुमार कुशवाह ने मौत को गले लगा लिया।राजकुमार के परिजनों से मिली शुरुआती जानकारी के अनुसार, वह अपनी पढ़ाई और पढ़ाई के लिए लिए गए एजुकेशन लोन (Education Loan) को लेकर भारी मानसिक दबाव में था। लोन और करियर की इसी चिंता के चलते उसने यह खौफनाक कदम उठा लिया।
तीसरा मामला आजाद नगर थाना क्षेत्र से सामने आया है। यहां एमपी ऑनलाइन (MP Online) कियोस्क का संचालन करने वाले गजेंद्र (पुत्र माधवलाल) ने अपने घर में फांसी लगा ली। परिजनों के मुताबिक, कुछ समय पहले गजेंद्र की पत्नी की मौत हो गई थी। पत्नी के जाने के बाद से ही गजेंद्र गहरे सदमे और मानसिक तनाव से गुजर रहा था, जिसके चलते उसने सुसाइड कर लिया।
नहीं मिला कोई सुसाइड नोट
जानकारी के अनुसार, इन तीनों ही मामलों में घटनास्थल से कोई भी सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ है। सुसाइड नोट न मिलने के कारण पुलिस मौत के सटीक कारणों का पता लगाने के लिए कड़ियों को जोड़ रही है। इंदौर पुलिस ने तीनों ही मामलों में मर्ग कायम कर शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। परिजनों और दोस्तों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं, ताकि आत्महत्या के पीछे की मुख्य वजहों को पूरी तरह स्पष्ट किया जा सके।
इंदौर जैसे जीवंत और युवाओं के शहर में एक ही दिन में तीन सुसाइड, विशेषकर छात्रों द्वारा उठाए जा रहे ऐसे कदम, समाज और प्रशासन के लिए एक अलार्मिंग सिचुएशन (चिंताजनक स्थिति) है। शिक्षा का दबाव, वित्तीय बोझ और व्यक्तिगत नुकसान युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य को बुरी तरह प्रभावित कर रहे हैं, जिसके लिए अब सामूहिक जागरूकता और काउंसलिंग की सख्त जरूरत महसूस की जा रही है।

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