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उत्तराखंड न्यूज़ : निर्जला एकादशी पर हरिद्वार पहुंचे श्रद्धालु, प्रशासन ने मेला क्षेत्र को 40 सेक्टर में बांटा

Abhyuday Bharat News / Thu, Jun 25, 2026 / Post views : 170

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हरिद्वार. निर्जला एकादशी (Ekadashi) पर हरिद्वार में आस्था का सैलाब उमड़ा है। सुबह से गंगा घाटों पर श्रद्धालु हजारों की संख्या में जुटे हैं। सभी ने एकादशी पर मां गंगा में पवित्र डुबकी लगाई। श्रद्धालु जल और फल दान कर पुण्य कमा रहे हैं। भक्तों की भीड़ और आयोजन को देखते हुए प्रशासन ने पहले से तैयारियां कर रखी थी। प्रशासन ने मेला क्षेत्र को 12 जोन और 40 सेक्टर में बांटा है। जिससे व्यवस्थाएं सुचारु रुप से चलती रहे।

बता दें कि साल में 24 एकादशी का व्रत रखा जाता है। एक शुक्ल पक्ष और एक कृष्ण पक्ष में। लेकिन ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष में आने वाली निर्जला एकादशी का स्थान विशेष माना जाता है। भीषण गर्मी के बीच रखा जाने वाला यह व्रत तप और संयम का प्रतीक होता है। इसे भीमसेनी एकादशी (Bhimseni Ekadashi) भी कहा जाता है और मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने से वर्षभर की सभी एकादशी का पुण्य प्राप्त होता है।

पंचांग के अनुसार एकादशी तिथि

हिंदू पंचांग के अनुसार निर्जला एकादशी की तिथि 24 जून को शाम 06:12 बजे शुरू होगी और 25 जून को रात्रि 08:09 बजे तक रहेगी। उदया तिथि को आधार मानते हुए व्रत 25 जून, गुरुवार को रखा जाएगा। वहीं इस व्रत का पारण 26 जून शुक्रवार को सुबह 5:25 बजे से 8:13 बजे के बीच किया जाएगा।

सबसे कठिन एकादशी व्रत

निर्जला एकादशी को वर्ष का सबसे कठिन व्रत माना जाता है, क्योंकि इसमें साधक बिना अन्न और जल के उपवास रखते हैं। गर्मी के मौसम में इस व्रत का पालन करना तप के समान है। हालांकि इसे अपनी शारीरिक क्षमता के अनुसार करने की सलाह दी जाती है, यदि कोई निर्जल नहीं रह सकता, तो वह फलाहार के साथ भी व्रत कर सकता है।

एकादशी की पूजा-विधि और नियम

इस दिन प्रातः सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करने के बाद व्रत का संकल्प ले। पीले वस्त्र धारण कर भगवान विष्णु की पूजा करे. पूजा में पीले पुष्प, चंदन, केसर, धूप, दीप, फल, मिठाई और तुलसी दल अर्पित करें। जप करने के बाद लक्ष्मीनारायण की आरती की जाती है। निर्जला एकादशी पर जल से भरा कलश, फल, वस्त्र, पंखा और रुपयों का दान विशेष माना गया है। अगले दिन निर्धारित समय में व्रत का पारण करने के बाद ही अन्न ग्रहण करे. इस दिन किए गए दान और उपासना का विशेष महत्व बताया गया है।

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