Sun, 12 Jul 2026
Logo

ब्रेकिंग

बंद कमरे में चल रहा था जिस्मफरोशी का धंधा: पुलिस ने दबिश देकर 5 पुरुष और 2 महिलाओं को पकड़ा....

‘और गहरी हो गई हैं दरारें’, कई कोच जल्द ही गौतम गंभीर के स्टाफ को छोड़ सकते हैं!

Shekhar Suman के सहयोगी Dharmesh Sangani के ठिकानों पर ईडी का छापा, सबूत मिटाने 13वीं मंजिल से फेंका फोन …

गांवों में अफसर तैयार करेगी योगी सरकार की डिजिटल लाइब्रेरी, 32 जिलों की 11,350 पंचायतों में होगी सुविधा

महतारी वंदन योजना: 626.25 करोड़ की 29वीं किस्त जारी, CM साय ने कहा- आर्थिक स्वावलंबन की नई पहचान बन रही है योजना

मैनपाट में बाइकर्स गैंग पर पुलिस का एक्शन: 60 बाइक चालकों को पकड़ा, स्टंट करते वीडियो हुआ था वायरल

चलती ट्रेन में चढ़ते समय फिसला पैर, RPF जवान ने बचाई यात्री की जान

‘मंदिर नहीं, बनिया की दुकान…’ महंत धर्मदास बोले- चंपत कंपनी की नीयत ठीक नहीं, गोविंदगिरी पर भी तंज

11 July History: मुंबई ट्रेन ब्लास्ट से लेकर सिरिशा बांदला की अंतरिक्ष उड़ान तक, जानिए प्रमुख घटनाएं

भारत-न्यूजीलैंड में हुए 18 समझौते, 2030 तक आपसी व्यापार दोगुना करने का टारगेट

सूचना

ABN NEWS :- देश दुनिया : 'भारत ही युद्ध समाप्त कर सकता है': पश्चिम एशिया पर बोले मोहन भागवत- देश की जनता मानवता को मानती है...

Abhyuday Bharat News / Fri, Mar 20, 2026 / Post views : 143

Share:

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा है कि अब दुनिया भर के देश पश्चिम एशिया में जारी युद्ध रोकने के लिए भारत की ओर देख रहे हैं। उन्होंने कहा है कि दुनिया में जंगल का कानून चलता है, लेकिन भारत के लोग मानवता का नियम पालन करते हैं।

नई दिल्ली: आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा है कि दुनिया मान रही है कि सिर्फ भारत ही पश्चिम एशिया में जारी युद्ध को खत्म कर सकता है। मोहन भागवत ने विभिन्न देशों की ओर से इस युद्ध को रोकने के लिए भारत को दखल देने के लिए कहने का हवाला दिया है। ऐसे देशों में संयुक्त अरब अमीरात और फिनलैंड सबसे आगे रहे हैं।

विश्व के कई देशों ने यह भावना जाहिर कि है कि जिस तरह से भारत के अमेरिका और इजरायल से अच्छे संबंध हैं और ईरान से भी पुरानी मित्रता है। इसमें ही यह क्षमता है, जो दोनों पक्षों के बीच दखल देकर जंग पर पानी डाल सकता है। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सर संघचालक मोहन भागवत ने नागपुर में एक कार्यक्रम में विश्व के इसी नजरिए पर जोर दिया है। 

'दुनिया को सद्भाव चाहिए, संघर्ष नहीं'

नागपुर में विश्व हिंदू परिषद के विदर्भ प्रांत कार्यालय का शिलान्यास करने के बाद मोहन भागवत ने एक सभा को संबोधित करते हुए वैश्विक संघर्ष की जड़ और सौहार्द के माध्यम से इसके समाधान के बारे में बात की है। उन्होंने कहा कि 'युद्ध स्वार्थी हितों का परिणाम है, दुनिया को सद्भाव चाहिए, संघर्ष नहीं।

'लड़खड़ाते विश्व में संतुलन बनाना हमारा कर्तव्य'

भारत और दुनिया की सोच में अंतर के बीच लकीर खींचते हुए आरएसएस चीफ ने कहा, 'भारत के लोग मानवता के कानून का पालन करते हैं, लेकिन बाकी दुनिया जंगल के कानून का पालन करती है। धर्म का आधार देकर लड़खड़ाते हुए विश्व में संतुलन कायम करना हमारा कर्तव्य है।


चले हुए युद्ध में बार-बार देशों से आवाज उठ रही कि इसको समाप्त भारत ही कर सकता है। क्यों, क्योंकि भारत की इस प्रवृत्ति का ज्ञान उनको है। इसलिए ये काम होना है। पहले हमको तैयार होना पड़ेगा।

मोहन भागवत, आरएसएस प्रमुख


'हम जबसे उठने लगे हैं, प्रचंड जागृति पहले शुरू हो गई'

  • मोहन भागवत के पश्चिम एशिया युद्ध को लेकर कहा कि करीब 2,000 वर्षों से दुनिया ने विभिन्न संघर्षों के समाधान का प्रयास किया है, लेकिन कई चुनौतियां बनी हुई हैं।

  • उन्होंने यह भी ध्यान दिलाया कि धार्मिक असहिष्णुताजबरन धर्मांतरण और श्रेष्ठता और हीनता का विचार अभी भी मौजूद है।

  • ऐसे में मोहन भागवत ने बताया कि भारत का परंपरागत दर्शन एकता और परस्पर संबद्धता को बढ़ावा देता है।

  • आरएसएस प्रमुख ने कहा कि भारतीय सोच का आधार ये है कि हर कोई जुड़ा हुआ है और मॉडर्न साइंस भी धीरे-धीरे इसी समझ की ओर बढ़ रहा है।

  • उनका कहना है कि स्थायी शांति सत्ता संघर्ष से नहीं, एकता, अनुशासन और धर्म के पालन से आ सकता है।

  • उन्होंने कहा कि धर्म धर्मग्रंथों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि दैनिक व्यवहार में भी प्रदर्शित होना चाहिए। (पीटीआई इनपुट के साथ)

Tags :

#breking news

विज्ञापन

Advertisement
Advertisement

विज्ञापन

Advertisement

जरूरी खबरें

विज्ञापन

Advertisement
Advertisement

विज्ञापन

Advertisement

विज्ञापन

Advertisement

विज्ञापन

Advertisement

विज्ञापन

Advertisement

Related Posts