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ABN न्यूज :- देश दुनिया : होर्मुज छोड़ दूसरे रूट से आने लगा कच्चा तेल!..कैसे चलेगी भारत की गाड़ी, 'संकल्प' से संभव होगा?

Abhyuday Bharat News / Tue, Mar 24, 2026 / Post views : 148

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अमेरिका-ईरान युद्ध के बीच होर्मुज स्ट्रेट से ऑयल सप्लाई बाधित हो चुकी है। ऐसे में भारत ने दशकों पुराने एनर्जी मैप में बड़ा बदलाव किया है। भारतीय नौसेना के ऑपरेशन संकल्प से समझते हैं।

नई दिल्ली: ईरान और ओमान के बीच संकरे समुद्री गलियारे होर्मुज स्ट्रेट से तेल की सप्लाई तकरीबन बाधित हो चुकी है। मिसाइलों और ड्रोंस की बौछार के बीच भारत को जो भी तेल होर्मुज के रास्ते से आ रहा है, वो भी भारतीय नौसेना की निगरानी में आ रहा है। ऐसे में भारत ने अब अपनी ऑयल स्ट्रेटजी में बड़ा बदलाव किया है। खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को लोकसभा में इसकी जानकारी दी थी। भारत जहां पहले 27 देशों से कच्चा तेल मंगाता था, अब 41 देशों से यह आयात करता है। साथ ही, गैर होर्मुज रूट से तेल आयात बढ़ा दिया गया है। इस बीच, ईरान ने भारत की रिफाइनरियों को ICE ब्रेंट के मुकाबले प्रीमियम पर कच्चा तेल देने की पेशकश की है। भारत ने अमेरिकी दबाव में मई, 2019 से ईरान से कच्चे तेल का आयात नहीं किया है।

भारत कर रहा तेल आयात के लिए री-रूटिंग

ओपेन मैगजीन पर छपी एक खबर के अनुसार, हाई रिस्क वाले होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों का निकलना बेहद भारी पड़ रहा है। इससे तेल टेंकरों की लागत भी ज्यादा आ रही है। भारत का युद्ध से पहले इस स्ट्रेट से करीब 88 फीसदी तेल और 55 फीसदी गैस का आयात होता था। नई दिल्ली अब नए सिरे से दशकों पुराने इस लॉजिस्टिक मैप में तेजी से बदलाव कर रहा है, ताकि तेल टैंकरों की आवाजाही के लिए वैकल्पिक रूट दिया जा सके। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी पश्चिम एशिया संकट की चुनौतियों से निपटने की भारत की कोशिशों के बारे में सोमवार को लोकसभा को जानकारी दी।

समुद्री रास्ते को जोखिममुक्त बनाने पर तेजी से काम

  • रिपोर्टों के अनुसार, भारत ने जोखिममुक्त तेल के आयात पर काम करना तेजी से शुरू कर दिया है। होर्मुज स्ट्रेट को छोड़कर भारत अब दूसरे ऑयल रूट्स से करीब 75 फीसदी तेल का आयात कर रहा है। यह फरवरी में करीब 55 फीसदी था।

  • बीबीसी की एक रिपोर्ट के अनुसार, युद्ध से पहले 25 से 27 लाख बैरल प्रतिदिन कच्चा तेल भारत होर्मुज के रास्ते मंगाता था। यह तेल ज्यादातर इराक, सऊदी अरब, यूएई और कुवैत से आता है।

  • वहीं, भारत अपना करीब 80 से 85 फीसदी एलपीजी आयात करता है। चीन के बाद भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा आयातक है। भारत का तकरीबन सारा LPG आयात कतर, सऊदी अरब, यूएई और कुवैत से होता है।


भारत का होर्मुज के बिना वैकल्पिक रूट ये हैं

  • बीबीसी की एक रिपोर्ट में ऑयल टैंकरों के डेटा पर नजर रखने वाली संस्था केप्लर के अनुसार, भारत अपना तेल का आयात रूस या अटलांटिक बेसिन, अमेरिका, पश्चिमी अफ्रीका और लैटिन अमेरिकी देशों से बढ़ा सकता है। हालांकि, यह रूट खाड़ी के देशों के 5-7 दिनों के मुकाबले 25-45 दिन लग सकता है।

  • इससे एक तो सप्लाई चेन में काफी वक्त लगता है और दूसरा इस माल ढुलाई की लागत काफी बढ़ जाती है।

  • एक्सपर्ट के अनुसार, अगर भारत ऐसा करता है तो यह फिर से रूसी क्रूड ऑयल की तरफ जाने जैसा होगा। फिलहाल, करीब 2.5 से 3 करोड़ रूसी तेल बैरल हिंद महासागर में तैर रहे हैं। भारत और चीन रूसी तेल के बड़े खरीदार हैं।


ऑपरेशन संकल्प से तेल टैंकरों की हो रही सुरक्षित वापसी

ऑपरेशन संकल्प के तहत भारतीय नौसेना के डिस्ट्रॉयर्स यानी युद्धपोत भारत पहुंचने तक पूरे रास्ते इन यो ऑयल टैंकरों की मुस्तैदी से सुरक्षा कर रहे हैं। बीते 18 मार्च को एक ऑयल टैंकर जाग लाडकी नौसेना की सुरक्षा में मुंद्रा पोर्ट पर पहुंचा था।

जमीनी पाइपलाइंस भी बन सकता है विकल्प

  • रिपोर्टों के अनुसार, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) की हबशाह-फूजिराह लाइन और सऊदी अरब की पेट्रोलाइन फिलहाल होर्मुज को बायपास करके तेल को ओमान की खाड़ी या लाल सागर तक पहुंचा रही हैं। हालांकि, ये तेल की आवाजाही के इन विकल्पों की क्षमता सीमित है।

  • भारत इसका कितना फायदा उठा पाएगा, यह आने वाले समय की बात है। हालांकि, ये पाइपलाइनें होर्मुज के 20 मिलियन बैरल की जगह 2.6 मिलियन बैरल प्रतिदिन ही तेल की सप्लाई कर सकती हैं। साथ ही इराक, कुवैत और कतर जैसे देशों के पास तो पाइपलाइन जैसा कोई विकल्प नहीं हैं।


होर्मुज से गुजरे बिना भारत आ रहा 70 फीसदी तेल

पेट्रोलियम मंत्रालय में संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने बीते 11 मार्च को रिपोर्टरों से कहा था कि भारत ने कच्चे तेल की खरीद के सोर्स का विस्तार किया है। हम करीब 70 फीसदी तेल ऐसे देशों से मंगा रहे हैं, जो होर्मुज स्ट्रेट से नहीं गुजरते हैं। अमेरिका-ईरान युद्ध शुरू होने से पहले भारत का करीब 55 फीसदी तेल होर्मुज स्ट्रेट से आता था।

भारत के पास अभी 53 लाख मीट्रिक टन ऑयल रिजर्व

  • वहीं, सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी लोकसभा में बयान दिया था कि भारत पहले 27 देशों से कच्चे तेल और गैस का आयात करता था, जो अब बढ़कर 41 देश हो गए हैं।

  • उन्होंने कहा था कि 11 साल में भारत ने अपने कच्चे तेल के आयात में विविधता लाई है। भारत अब 41 देशों से एनर्जी का आयात करता है। साथ ही हम 65 लाख मीट्रिक टन ऑयल रिजर्व पर दिन-रात काम कर रहे हैं। हमारे पास अभी 53 लाख मीट्रिक टन क्रूड ऑयल का रिजर्व है।


अमेरिका-रूस मिलकर 'पिलाएंगे' भारत को तेल

  • रिपोर्ट्स के अनुसार, रूस का तेल तो भारत को मिल ही रहा है। वहीं, अमेरिका और लैटिन अमेरिकी देशों से तेल की खरीद भारत के तेल आयात की विविधता को बढ़ा सकता है। इस रूट से तेल मंगाने पर 25-45 दिन लग जाते हैं। इससे तेल की ढुलाई की लागत और बीमा लागत बढ़ जाती है।

  • हालांकि, इन देशों से तेल मंगाने पर तेल की कीमतें कंट्रोल करने में मदद मिल सकती है। नाइजीरिया, अंगोला जैसे पश्चिमी अफ्रीकी देशों से कच्चा तेल फारस की खाड़ी के रास्ते से नहीं आता है।


ईरान भी दे रहा भारतीय तेल टैंकरों को रास्ता

भारत ने तेल को लेकर ईरान से लगातार बातचीत जारी रखी है। कूटनीतिक रूप से भारत को बड़ी कामयाबी इस बात पर मिली है कि होर्मुज स्ट्रेट के आसपास फंसे हुए उसके जहाजों को ईरान सेफ पैसेज भी दे रहा है। ईरान का यह कदम मित्र देशों के लिए उठाया गया है।

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# International News

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