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: समय पर GPF की राशि मिलने से बच गई होती युवक की जान, विलम्ब का जिम्मेदार कौन..??

Admin / Mon, Jun 2, 2025 / Post views : 546

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👉 जल संसाधन विभाग कोरबा संभाग के अधिकारी की उदासीनता और घोर लापरवाही से समय पर नहीं मिल पाई सहायक मानचित्रकार को GPF की राशि

👉ABN कोरबा न्यूज़/

जल संसाधन विभाग कोरबा संभाग के अधिकारी की उदासीनता और घोर लापरवाही से समय पर सहायक मानचित्रकार को GPF की राशि का भुगतान नहीं मिल पाने के कारण कर्मचारी के बेटे ने सुसाइड कर ली। इस पूरे मामले में पड़ताल करने पर जल संसाधन विभाग कोरबा संभाग के जिम्मेदार अधिकारी और कार्यालय के शाखा प्रभारी बाबू की लापरवाही सामने आई हैं।

मामला कार्यालय कार्यपालन अभियंता जल संसाधन विभाग कोरबा संभाग के अंतर्गत सहायक कार्यालय जल संसाधन उपसंभाग पाली, जिला कोरबा का हैं, जहां पदस्थ सहायक मानचित्रकार ने अपने बेटे की शादी के लिए अपने सामान्य भविष्य निधि खाता से राशि निकालने के लिए अपने उच्च अधिकारी से दरख्वास्त की, किन्तु अपने पद के मद में चूर अधिकारी ने समय पर सम्बंधित कर्मचारी की GPF राशि का भुगतान नहीं किया।

जल संसाधन विभाग के उक्त सहायक मानचित्रकार ने बड़ी उम्मीदों से अपने बेटे की शादी के सपने सजायें थे, किन्तु उनके ही विभाग की घोर लापरवाही से उनके बेटे की जान चली गई और उनके लिए जीवन भर का ज़ख्म दे गया। ऐसा ज़ख़्म जो कभी भर नहीं पायेगा।

जल संसाधन उप संभाग पाली, जिला कोरबा में पदस्थ सहायक मानचित्रकार महेंद्र पाल सिंह कंवर ने अपने ही विभाग की लापरवाही और असंवेदनशीलता को लेकर दिनांक 05.05.2025 को कोरबा कलेक्टर को लिखित शिकायत की थी। शिकायत पत्र में सम्बंधित कर्मचारी ने समय पर जीपीएफ की राशि नहीं मिलने पर, आर्थिक स्थिति ख़राब होने के कारण तथा अड़चन आने के कारण उनके पुत्र प्रवीण पाल सिंह (उम्र 30 वर्ष) ने आत्महत्या कर ली।

शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि यदि विभाग के जिम्मेदार अधिकारी और बाबूओं ने यदि तत्कालीन समय पर पैसा जारी कर दिया होता तो शायद उनके बेटे की जान नहीं जाती। पीड़ित कर्मचारी ने न्याय की अपेक्षा कलेक्टर कोरबा से की थी।

शिकायत पत्र में ये कहा गया है कि सहायक मानचित्रकार महेंद्र पाल सिंह कंवर ने अपने पुत्र के विवाह के लिए सामान्य भविष्य निधि खाता से राशि स्वीकृत करने हेतु अप्रैल 2024 में आवेदन किया था। अधीक्षण अभियंता जल संसाधन विभाग बिलासपुर से 2 जुलाई 2024 को राशि 2 लाख 49 हजार रूपये स्वीकृत होने के बावजूद, उनको समय पर राशि का भुगतान नहीं किया गया। सामान्य भविष्य निधि खाता में पर्याप्त राशि होने तथा स्वीकृत होने के बाद उन्हें राशि का भुगतान समय पर नहीं किया गया।

शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि, विभाग के जिम्मेदार अधिकारी और बाबुओं की घोर लापरवाही और उदासीनता के कारण समय पर राशि का भुगतान नहीं होने के कारण उनके जीवन में खुशियों का पल मातम में बदल गया। क्या इस क्षति की भरपाई उनके विभाग के जिम्मेदार अधिकारी और सम्बंधित शाखा प्रभारी बाबूओं के द्वारा की जा सकती हैं...??

हमारे संवाददाता के द्वारा पीड़ित कर्मचारी से मामले की जानकारी लेने पर, उनके द्वारा अंत्यंत दुःखद स्वर में बताया गया कि आज की स्थिति में उन्हें पैसा मिल गया हैं, और उन्होंने बताया कि इसकी जानकारी कलेक्टर कोरबा को दे दी गई हैं। मामले के सम्बन्ध में जल संसाधन विभाग कोरबा संभाग के जिम्मेदार अधिकारी कार्यपालन अभियंता शंकर लाल द्विवेदी से उनका पक्ष जानने के लिए कॉल करने पर उनके द्वारा यह मामला पुराना हैं, कह कर तुरन्त कॉल काट दिया गया।

छत्तीसगढ़ में हर तरफ सुशासन की बात कही जा रही हैं। छत्तीसगढ़ के माननीय मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय हर जिले में सुशासन तिहार के तहत दौरा कर, आम जनता का हाल जान रहें हैं, तथा जनता की समस्याओं का त्वरित निदान कर रहें हैं। ऐसे में प्रदेश के महत्वपूर्ण विभाग के जिम्मेदार अधिकारी के द्वारा विष्णु के सुशासन को ठेंगा दिखाया जा रहा हैं। सवाल यह हैं कि क्या आदिवासी वर्ग के पीड़ित कर्मचारी को इस मामले में विष्णु के सुशासन में उचित न्याय मिल पायेगा..?? और दोषियों के ऊपर क्या कार्यवाही हो पायेगी..??

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