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छत्तीसगढ़ न्यूज़ : 42 डिग्री की तपिश में कल से खुलेंगे स्कूल : पालकों ने किया विरोध, बच्चों की सुरक्षा पर उठाए सवाल....

Abhyuday Bharat News / Mon, Jun 15, 2026 / Post views : 4

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42 डिग्री की तपिश में कल से खुलेंगे स्कूल : पालकों ने किया विरोध, बच्चों की सुरक्षा पर उठाए सवाल, कहा – बच्चे को कुछ हो गया तो कौन होगा जिम्मेदार?

रायपुर। छत्तीसगढ़ में भीषण गर्मी और लू के प्रकोप के बीच सरकारी निर्देश के अनुसार 16 जून मंगलवार से स्कूल खुल रहे हैं। कई जिलों में दिन का तापमान अभी भी 42 डिग्री सेल्सियस के आसपास चल रहा है, जबकि स्वास्थ्य विभाग की लू नियंत्रण एडवाइजरी में छोटे बच्चों को घर से बाहर निकलने तक की मनाही है। ऐसे में अभिभावक, शिक्षाविद् और स्कूल संगठन सरकार के इस फैसले पर सवाल उठा रहे हैं।

बुनियादी सुविधाओं का अभाव

स्थिति और चिंताजनक इसलिए है, क्योंकि सैकड़ों सरकारी स्कूलों में अभी बिजली कनेक्शन तक नहीं पहुंचा है। ग्रामीण क्षेत्रों में तो घंटों-घंटों बिजली कटौती जारी है। कई स्कूलों में पंखे तक नहीं लगे हैं। कूलर या एसी की तो बात ही दूर है। अभिभावक पूछ रहे हैं कि जिस गर्मी में घरों में कूलर और एसी फेल हो रहे हैं, वहां भट्ठी जैसे स्कूलों में बच्चे कैसे पढ़ाई करेंगे?

पैरेंट्स एसोसिएशन ने सरकार के 16 जून से स्कूल खोलने के फैसले का खुलकर विरोध किया है। उन्होंने कहा है कि बच्चों की जान खतरे में डालने का काम हो रहा है। अगर किसी बच्चे को कुछ हो गया तो जिम्मेदार कौन होगा?

शिक्षाविदों और प्राइवेट स्कूलों का विरोध

शिक्षाविदों ने भी सरकार से अपील की है कि स्कूल खोलने से पहले सभी स्कूलों में बुनियादी व्यवस्था दुरुस्त कर ली जाए। एक शिक्षाविद् ने कहा, पहले पंखे, बिजली और पीने का पानी सुनिश्चित करें, फिर स्कूल खोलने का निर्देश देना अच्छा होगा। अभी भीषण गर्मी में स्कूल खोलना सीधे बच्चों की जान से खिलवाड़ है।

प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन के अध्यक्ष राजीव गुप्ता ने कहा, सरकार को गर्मी का ध्यान रखना चाहिए। पहले स्कूलों में उचित व्यवस्था कर लें, उसके बाद स्कूल खोलना सही होगा।

स्वास्थ्य विभाग की चेतावनी

स्वास्थ्य विभाग की एडवाइजरी में साफ कहा गया है कि छोटे बच्चे लू के सबसे अधिक शिकार होते हैं। फिर भी स्कूल खोलने का फैसला लिया गया है, जिससे अभिभावकों में आक्रोश है। डॉक्टर के मुताबिक अभी मौसम को देखते हुए स्कूल खोलने की उचित समय नहीं है। अभी भी लू के मरीज इलाज के लिए आ रहे हैं। ऐसे में छोटे बच्चों को गर्मी में सफर कर स्कूल पहुंचना, स्कूलों में पंखें की व्यवस्था के बगैर स्कूलों में बैठाना बिल्कुल सेफ नहीं है।

सरकार के फैसले पर उठते सवाल ?

16 जून से स्कूल खोलने के फैसले पर अभिभावक, शिक्षाविद् और स्कूल संगठन सवाल उठा रहे हैं। उनका कहना है कि क्या सरकार ने सभी स्कूलों में बिजली, पंखे और पेयजल की व्यवस्था सुनिश्चित कर ली है? लू की चेतावनी के बावजूद स्कूल खोलने का फैसला कितना उचित है? अगर किसी बच्चे की तबीयत बिगड़ी या जान गई तो जिम्मेदारी किसकी होगी? पालकों ने सरकार से तत्काल हस्तक्षेप और स्कूल खोलने की तारीख में पुनर्विचार की मांग की है। फिलहाल कल से स्कूल खुल रहे हैं, लेकिन माहौल में तनाव और चिंता साफ दिख रही है।

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