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: सुकमा में जवानों ने ढूढ़ा नक्सलियों का बंकर, सुरंग में बना रखी थी हथियारों की फैक्ट्री

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ABN EXPRESS NEWS 24x7

सुरंग में नक्सलियों की हथियार फैक्ट्री, सुकमा बीजापुर बार्डर पर था अंडरग्राउंड ठिकाना

सुकमा डीआरजी के जवानों ने नक्सलियों का बंकर ढूंढ निकाला। बंकर सुकमा-बीजापुर सीमा में तुमरेल ओर तलपेरू नदी के बीच था। - Dainik Bhaskar

जमीन के अंदर हथियार बनाने भर रखे थे सामान, DRG के जवानों ने तोड़ा

तीन जिलों की संयुक्त कार्रवाई पुलिस को सूचना मिली थी कि दंतेवाड़ा, बीजापुर और सुकमा जिलों की सरहदी क्षेत्र में करीब 200-250 नक्सली मौजूद हैं। इन नक्सलियों के साथ-साथ नक्सली कमांडर हिड़मा और बटालियन नंबर 1 के कमांडर देवा भी इलाके में मौजूद थे। इसी सूचना पर 15 जनवरी की शाम दंतेवाड़ा, बीजापुर और सुकमा जिलों की डीआरजी, कोबरा बटालियन, CRPF के करीब 1500 से 2000 जवानों ने ऑपरेशन शुरू किया। 12 नक्सलियों के शव बरामद 15 जनवरी की रात तक जवान नक्सलियों के कोर इलाके में पहुंच गए थे। 16 जनवरी की सुबह करीब 8-9 बजे नक्सलियों से पहली मुठभेड़ हुई, जिसमें 2 नक्सली मारे गए थे। इसके बाद दिनभर रुक-रुक कर गोलीबारी होती रही। 16 तारीख को करीब 8-10 घंटे तक लगातार फायरिंग होती रही, लेकिन रात होने पर गोलीबारी रुक गई। अगले दिन, 17 जनवरी की सुबह से जवानों ने इलाके में सर्च ऑपरेशन जारी रखा और 12 नक्सलियों के शव बरामद किए।

 

सुकमा और बीजापुर जिले के बॉर्डर क्षेत्र में एंटी नक्सल ऑपरेशन के दौरान जवानों को बड़ी सफलता हाथ लगी है। जवानों ने नक्सलियों द्वारा बनाई गई एक सुरंग का पता लगाया, जो सुकमा और बीजापुर के बीच स्थित तुमरेल और तलपेरू नदी के किनारे छिपी हुई थी। इस सुरंग में नक्सलियों ने बम और बंदूकें बनाने के लिए एक पूरी फैक्ट्री स्थापित कर रखी थी, जिसे देखकर जवानों के होश उड़ गए। सुरंग में हथियार बनाने की फैक्ट्री सुकमा डीआरजी के जवान जब सुरंग में पहुंचे, तो उन्होंने देखा कि सुरंग के भीतर पूरा का पूरा एक कमरा बना हुआ था। कमरे के भीतर लेथ मशीनें लगी हुई थीं, जिनके जरिए नक्सली हथियार बनाने का काम कर रहे थे। सुरंग के भीतर जवानों को कई हथियार, बम और बॉटल बम भी मिले। इसके अलावा, बम और हथियार बनाने में इस्तेमाल होने वाले कई सामान भी बरामद किए गए।

कांच की बोतलों में बम बनाने की पुष्टि सुरंग में मिले सामान से यह पुष्टि हुई कि नक्सली लंबे वक्त से कांच की बोतलों में बम बनाने का काम कर रहे थे। यह जानकारी लंबे समय से सुरक्षा बलों को मिल रही थी, और अब इस ऑपरेशन के दौरान यह सच्चाई सामने आई। सुरंग की इस बड़ी खोज से नक्सलियों की हथियार निर्माण क्षमता और उनके माओवादी नेटवर्क की गतिविधियों का भी खुलासा हुआ है। बस्तर IG सुंदरराज पी ने कहा कि यह ऑपरेशन नक्सलियों के खिलाफ एक बड़ा प्रहार था। जवानों ने नक्सलियों के कोर जोन में घुसकर उन्हें मार गिराया। उन्होंने कहा कि लगातार हो रहे ऑपरेशनों के कारण माओवादी बैकफुट पर आ गए हैं।बहरहाल यह ऑपरेशन सुरक्षा बलों के लिए एक बड़ी सफलता मानी जा रही है, जो नक्सलियों के खिलाफ लगातार चलाए जा रहे अभियानों का हिस्सा है।

बीजापुर: एंटी नक्सल ऑपरेशन के दौरान जवानों को बड़ी सफलता हाथ लगी है. सुकमा और बीजापुर के बार्डर एरिया में माओवादियों की सुरंग मिली है. जवान जब नक्सलियों के बनाए सुरंग में पहुंचे तो उनके होश उड़ गए. सुरंग में बम और बंदकें बनाने की पूरी फैक्ट्री नक्सलियों ने लगा रखी थी. फोर्स को सर्चिंग के दौरान ये सुरंग सुकमा और बीजापुर के बीच में तुमरेल और तलपेरु नदी के किनारे मिली है.

सुरंग में नक्सलियों की हथियार फैक्ट्री: सुकमा डीआरजी के जवान जब सुरंग के भीतर टॉर्च की रोशनी में पहुंचे तो उनके होश उड़ गए. सुरंग के भीतर पूरा का पूरा एक कमरा बना हुआ मिला. कमरे के भीतर कई तरह की लेथ मशीनें लगी हुई मिली. लेथ मशीनों के जरिए हथियार बनाने का यहां काम किया जा रहा था. सुरंग के भीतर से डीआरजी जवानों को कई हथियार और बम भी मिले हैं. सुरंग में कई बॉटल बम बनाकर रखे गए थे. हथियार और बम बनाने में इस्तेमाल होने वाले सामान भी बरामद किए गए. कांच की बोतलों में बमों को बनाए जाने की खबर लंबे वक्त से फोर्स को मिल रही थी.

देशी बीजीएल और लोहे के कारतूस: सुरंग में जांच के दौरान ये भी खुलासा हुआ कि नक्सली बड़ी संख्या में देशी बीजीएल और लोहे से बने कारतूस बना रहे हैं. बीते दिनों ईटीवी भारत की टीम ने एनकाउंटर वाली जगह से लोहे के कारतूस और बीजीएल सेल की तस्वीरें दिखाई थी. ये पहली बार नहीं है जब नक्सलियों की फैक्ट्री जंगल में मिली है. इससे पहले भी जंगल के भीतर से नक्सलियों की लगाई लेथ मशीन पुलिस ने बरामद की है.

बीजापुर में शहीद हुए थे 8 जवान: 6 जनवरी को बीजापुर के कुटरु में सर्चिंग अभियान से लौट रहे जवानों को निशाना बनाकर माओवादियों ने घातक विस्फोट किया. धमाके में डीआरजी के जवानों को लेकर जा रही गाड़ी आसमान में उछल गई. घटना में डीआरजी के 8 जवान शहीद हो गए.

5 नक्सली हुए ढेर: 15 जनवरी को मद्देड़ में हुए एनकाउंटर में जवानों ने पांच नक्सलियों को मार गिराया. मारे गए सभी नक्सली हार्डकोर माओवादी थे. एनकांटर में ढेर हुए पांच में से 2 माओवादी महिला थी. मुठभेड़ वाली जगह से भारी मात्रा में हथियार और गोला बारूद पुलिस ने बरामद किया.

12 नक्सली ढेर: 16 जनवरी को बीजापुर और सुकमा के बार्डर पर मुठभेड़ में जवानों ने 12 नक्सलियों को ढेर कर दिया. एनाकाउंटर में तीन जिलों के डीआरजी के जवान शामिल रहे. मारे गए नक्सली लंबे वक्त से बस्तर में हिंसा का खेल खेल रहे थे. सीएम और डिप्टी सीएम ने एनकाउंटर में शामिल जवानों को बधाई दी.

मुख्यमंत्री की माओवादियों से अपील: विष्णु देव साय ने माओवादियों से अपील करते हुए कहा कि वो हथियार छोड़ दें. मुख्यधार में शामिल होकर आम ग्रामीण की तरह जिंदगी बिताएं. साय ने कहा कि हिंसा के रास्ते पर चलकर किसी भी समस्या का समाधान नहीं निकलने वाला है. हिंसा से बस्तर का विकास रुकेगा और आपका और आपके परिवार का भी भविष्य बर्बाद हो जाएगा.

अमित शाह ने दी 2026 की डेडलाइन: अमित शाह ने अपने बस्तर दौरे पर कहा था कि साल 2026 तक माओवाद पूरी तरह से खत्म कर दिया जाएगा. नक्सली या तो हथियार डाल दें या फिर बहादुर जवानों की गोली का सामना करने के लिए तैयार रहें. गृहमंत्री ने कहा था कि जब वो साल 2026 में आएंगे तब माओवाद समाप्त हो चुका होगा.

लोन वर्राटू और नियद नेल्लानार: माओवादियों के पुनर्वास के लिए सरकार ने दो योजनाएं चलाई हैं. पहली नियद नेल्लानार और दूसरी लोन वर्राटू. दोनों योजनाओं के तहत सरेंडर करने वाले नक्सलियों के पुनर्वास के लिए नकद राशि के साथ साथ कई सुविधाएं दी जाती हैं. डिप्टी सीएम विजय शर्मा ने सरेंडर करने वाले नक्सलियों को हर महीने 10 हजार देने का भी ऐलान किया है.

 

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