Wed, 27 May 2026
Logo

ब्रेकिंग

SC के SIR पर फैसले से चुनाव आयोग बहुत खुश हुआ, असली वजह हैं, संविधान का अनुच्छेद 326 और जनप्रतिनिधित्व कानून

ग्रामीण विकास को मिलेगी नई रफ्तार- 1 जुलाई से लागू होगा वीबी-जी-राम-जी मिशन, अब मिलेगा 125 दिनों का गारंटीड रो

’बारनवापारा के देवपुर जंगल में दिखी दुर्लभ विशाल भारतीय गिलहरी’

रायपुर : ’तेन्दूपत्ता संग्रहण में छत्तीसगढ़ ने बनाया नया रिकॉर्ड, अब तक 13.52 लाख मानक बोरा संग्रहित’

रायपुर : भीषण गर्मी में सतर्कता और संवेदनशीलता बरतें, जरूरतमंदों का सहारा बनें - मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

प्रगतिशील सतनामी समाज के द्वारा मस्तूरी में 31 मई को कार्यक्रम आयोजित

अग्निवीर में चयनित युवाओं का सम्मान

लगातार दूसरी बार आईपीएल के फाइनल में पहुंची बेंगलुरु, गुजरात को 92 रन से दी करारी शिकस्त, बल्लेबाजों के बाद गेंदबाजों ने

रणवीर सिंह पर FWICE का बैन, ‘डॉन 3’ छोड़ने के फैसले से मचा बॉलीवुड में हंगामा

टीएमसी में भगदड़ः 50 विधायक और 20 सांसद पाला बदलने को तैयार, एक दिन पहले 101 पार्षदों ने सामूहिक इस्तीफा दिया था

सूचना

बिलासपुर मस्तूरी न्यूज़ : भारतीय ज्ञान परंपरा की वैश्विक गूंज, सांदीपनी एकेडमी मस्तूरी में दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन

Abhyuday Bharat News / Sun, Jan 18, 2026 / Post views : 206

Share:

मस्तूरी (बिलासपुर) : जिले के पेंड्री मस्तूरी स्थित सांदीपनी एकेडमी परिसर में आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन 2026 सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। यह सम्मेलन सांदीपनी एकेडमी एवं शासकीय पातालेश्वर महाविद्यालय, मस्तूरी के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया। सम्मेलन के प्रथम दिवस का शुभारंभ मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्वलन, सरस्वती वंदना एवं छत्तीसगढ़ के राजकीय गीत से हुआ। मुख्य अतिथि प्रो. वी. के. सारस्वत (कुलपति, पं. सुंदरलाल शर्मा मुक्त विश्वविद्यालय) रहे। की-नोट स्पीकर प्रो. रमेश प्रसाद पाठक (दिल्ली सेंट्रल यूनिवर्सिटी) तथा डॉ. प्रमोद कुमार गुप्ता (सेंट्रल यूनिवर्सिटी हरियाणा) ने भारतीय ज्ञान परंपरा एवं विकसित भारत की संकल्पना पर सारगर्भित व्याख्यान दिए।

भारतीय ज्ञान परंपरा अतीत से भविष्य तक विकास की सशक्त धुरी: प्रो. रमेश प्रसाद

अतिथि वक्ता के रूप में दिल्ली सेंट्रल यूनिवर्सिटी से पधारे प्रो. रमेश प्रसाद पाठक और ने “भारतीय ज्ञान परंपरा एवं विकसित भारत की संकल्पना” विषय पर अपने उद्बोधन में कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा केवल अतीत की धरोहर नहीं, बल्कि वर्तमान और भविष्य की सशक्त आधारशिला है। उन्होंने बताया कि भारतीय दर्शन, योग, आयुर्वेद और जीवन मूल्यों ने वैश्विक मंच पर भारत की विशिष्ट पहचान स्थापित की है। विकसित भारत की संकल्पना सांस्कृतिक चेतना और नैतिक मूल्यों से जुड़ी हुई है। आज विश्व भारतीय चिंतन को आशा की दृष्टि से देख रहा है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे भारतीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक संदर्भों से जोड़कर आगे बढ़े और व्यापक रूप से कार्य करे। तकनीकी सत्रों में ऑनलाइन व ऑफलाइन माध्यम से बड़ी संख्या में शोध पत्र प्रस्तुत किए गए। सम्मेलन के द्वितीय दिवस में विभिन्न विषयों पर तकनीकी सत्रों का आयोजन किया गया, जिसमें देश-विदेश के शोधार्थियों ने सहभागिता करते हुए अपने शोध निष्कर्ष प्रस्तुत किए। समापन सत्र में अध्यक्षीय उद्बोधन देते हुए डॉ. अनिर्बन चौधरी (कल्याण स्नातकोत्तर महाविद्यालय, दुर्ग) ने सम्मेलन के निष्कर्षों को रेखांकित किया। धन्यवाद ज्ञापन आईक्यूएसी समन्वयक श्री रामखिलावन साहू द्वारा किया गया। इस अवसर पर सम्मेलन के संरक्षक व डायरेक्टर श्री महेंद्र चौबे, प्रशासनिक अधिकारी श्री विनीत चौबे, कन्वेनर डॉ. रीता सिंह, डॉ. दुर्गा बाजपेई सहित प्राध्यापकगण, शोधार्थी एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।

Tags :

#CG NEWS

विज्ञापन

Advertisement
Advertisement

विज्ञापन

Advertisement

जरूरी खबरें

विज्ञापन

Advertisement
Advertisement

विज्ञापन

Advertisement

विज्ञापन

Advertisement

विज्ञापन

Advertisement

विज्ञापन

Advertisement

Related Posts