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छत्तीसगढ़ न्यूज़ :-PM मोदी : वंदे मातरम के 150 साल... राजनीतिक विवाद के बीच आज संसद में पीएम मोदी करेंगे चर्चा की शुरुआत, जानें क्यों है खास

Abhyuday Bharat News / Mon, Dec 8, 2025 / Post views : 329

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वंदे मातरम के 150 साल... राजनीतिक विवाद के बीच आज संसद में पीएम मोदी करेंगे चर्चा की शुरुआत, जानें क्यों है खास

वंदे मातरम के 150 साल पूरे होने पर 8 दिसंबर को लोकसभा में एक खास चर्चा होगी। इसमें सदस्यों से राष्ट्रीय गीत की कम जानी-पहचानी ऐतिहासिक बातों पर जोर देने की उम्मीद है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दोपहर 12 बजे बहस शुरू करेंगे। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह आखिर में बोलेंगे।

नई दिल्ली : संसद के निचले सदन, लोकसभा में 8 दिसंबर को वंदे मातरम के 150 साल पूरे होने पर एक खास चर्चा होगी। इस दौरान इस मशहूर राष्ट्रीय गीत के कई जरूरी, कम जाने-पहचाने ऐतिहासिक पहलुओं पर रोशनी डाले जाने की उम्मीद है। सूत्रों के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सोमवार को दोपहर 12 बजे बहस शुरू करेंगे। इससे कार्यवाही की औपचारिक शुरुआत होगी। चर्चा के आखिर में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भी बोलेंगे।

एनडीए को चर्चा के लिए 3 घंटे

BJP की लीडरशिप वाली NDA सरकार को लोकसभा में डिबेट में हिस्सा लेने के लिए तीन घंटे दिए गए हैं, जबकि पूरी चर्चा के लिए कुल 10 घंटे तय किए गए हैं। इसकी वजह है कि यह डिबेट मंगलवार, 9 दिसंबर को अपर हाउस, यानी राज्यसभा में भी होगी। उम्मीद है कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह अपर हाउस में चर्चा की शुरुआत करेंगे।

ये चर्चाएं वंदे मातरम की विरासत और 150 साल पूरे होने के मौके पर खास पार्लियामेंट्री फोकस का हिस्सा हैं। इस बीच, कांग्रेस के आठ नेता भी लोकसभा में बोलेंगे, जिनमें लोकसभा के डिप्टी LoP गौरव गोगोई, प्रियंका गांधी वाड्रा, दीपेंद्र हुड्डा, बिमोल अकोईजम, प्रणीति शिंदे, प्रशांत पडोले, चमाला रेड्डी और ज्योत्सना महंत शामिल हैं।

पीएम का बयान... वंदे मातरम पर राजनीतिक तूफान

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस आरोप के बाद कि कांग्रेस ने 'वंदे मातरम' से ज़रूरी लाइनें हटा दीं, एक राजनीतिक तूफान खड़ा हो रहा है। इस बीच, अब संसद में एक खास बहस शुरू होने जा रही है। प्रधानमंत्री ने दावा किया था कि इस हटाने से 'बंटवारे के बीज बोए गए। प्रधानमंत्री ने 7 नवंबर को कहा था कि 1937 में, 'वंदे मातरम' की जरूरी लाइनें, जो इसकी आत्मा का सार हैं, हटा दी गईं।

पीएम ने कहा था कि 'वंदे मातरम' के दो हिस्सों को तोड़ दिया गया। आज की पीढ़ी को यह समझने की जरूरत है कि देश बनाने के इस महान मंत्र के साथ ऐसा अन्याय क्यों किया गया। क्योंकि वही बांटने वाली सोच आज भी देश के लिए एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।

हालांकि, कांग्रेस के सीनियर नेता जयराम रमेश ने PM मोदी की बातों पर पलटवार करते हुए कहा था कि यह कांग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC) का फैसला था। इसमें महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू, सरदार पटेल, नेताजी सुभाष चंद्र बोस, राजेंद्र प्रसाद और मौलाना अबुल कलाम आजाद जैसे कई जाने-माने नेता शामिल थे।

1875 को बंगदर्शन में छपा था वंदे मातरम

बंकिम चंद्र चटर्जी ने 'वंदे मातरम' लिखा और इसे पहली बार 7 नवंबर, 1875 को साहित्यिक पत्रिका बंगदर्शन में छापा। इसे पहली बार अगस्त 1905 में कलकत्ता (कोलकाता) के टाउन हॉल के पास आजादी की मांग करते हुए ब्रिटिश क्राउन के खिलाफ़ विरोध करने वाले छात्रों ने एक राजनीतिक नारे के तौर पर इस्तेमाल किया था। इस छात्र जुलूस ने 'स्वदेशी' और ब्रिटिश सामानों के बहिष्कार के विचार को बढ़ावा दिया।

1905 से 1947 तक, आजादी के लिए लड़ने वाले कई लोगों ने अंग्रेजों के खिलाफ 'वंदे मातरम' को एक पॉलिटिकल नारे के तौर पर उठाया, जिससे देशभक्ति की भावना पैदा हुई। दूसरे शब्दों में, यह नारा बंकिम चंद्र चटर्जी की मौत के बाद, खासकर राष्ट्रवादियों के बीच एक पॉलिटिकल जंग का नारा बन गया।

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