ब्रेकिंग
सूचना
यह आरोप लगाने वाले तौहीद हुसैन अकेले नहीं हैं। यूनुस की 'किचन कैबिनेट' का हिस्सा रहे आसिफ नजरुल ने दावा किया कि उन्हें इस समझौते से जुड़ी चर्चाओं में बुलाया भी नहीं गया था। यूनुस कैबिनेट के एक अन्य सदस्य और शेख हसीना विरोधी छात्र आंदोलन के नेता आसिफ महमूद शोजिब भुइयां ने कहा कि अंतरिम सरकार के दौरान बड़े फैसले कैसे लिए गए इस बारे में कुछ भी साफ नहीं है।
आसिफ महमूद ने कहा कि हम सुन रहे हैं कि सभी फैसले किचन कैबिनेट में नहीं लिए गए थे। खलीलुर रहमान ने कथित तौर पर यह समझौता (अमेरिका से डील) किया था। आसिफ ने दावा किया कि NCP की चिंताओं को नजर अंदाज किया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि आम चुनाव से ठीक तीन दिन पहले ही यह समझौता क्यों किया गया और इसे चुनी हुई सरकार के लिए क्यों नहीं छोड़ा गया। उन्होंने इसकी समीक्षा की भी मांग की।
यूनुस ने उन छात्रों को भी धोखा दिया, जिन्होंने जुलाई आंदोलन के बाद उन्हें सत्ता के शीर्ष पर बैठाया। यूनुस ने अराजकता रोकने के बजाय इन छात्रों को मैदान में उतार दिया, ताकि भीड़ की हिंसा के जरिए विरोध की आवाजों को दबाया जा सके। डेढ़ साल के कार्यकाल का इस्तेमाल यूनुस ने पूरी तरह खुद के लिए किया। उनके ऊपर चल रहे अदालती मामले वापस लिए गए। आयकर माफ किए गए और उन्हें भ्रष्टाचार के आरोपों से बरी कर दिया गया। यूनुस ने चुनाव के पहले अपना मकसद पूरा कर लिया था।
Tags :
# International News
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन