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छत्तीसगढ़ न्यूज : दुर्गम रास्ते, पहाड़ी में गांव, बस्तर में दर्द से तड़प रही गर्भवती को स्ट्रेचर पर लेटाकर 5 किमी पैदल चले जवान, बचाई जान.

Abhyuday Bharat News / Sun, Mar 29, 2026 / Post views : 115

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छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित बस्तर इलाके में जवानों ने मानवता की मिसाल पेश की है। जवानों ने एक गर्भवती महिला की जान बचाई है। महिला को सुरक्षित अस्पताल पहुंचाया।

जगदलपुर: छत्तीसगढ़ में अबूझमाड़ क्षेत्र में सुरक्षाबल के जवानों के काम की तारीफ हो रही है। नक्सल विरोधी अभियान पर तैनात ITBP के जवानों एक गर्भवती महिला की जिंदगी बचाई है। इंद्रावती राष्ट्रीय उद्यान के अंदर बसे बोटेर गांव में अचानक एक महिला को अचानक प्रसव पीड़ा शुरू हो गई। महिला दर्द से तड़प ही थी।

इस बात की जानकारी जैसे ही ITBP के जवानों को हुई। जवानों ने महिला के सफल रेस्क्यू किया। सुरक्षाबल के जवान करीब 5 किलोमीटर तक दुर्गम जंगल और पहाड़ी रास्तों से स्ट्रेचर पर लिटाकर महिला को अस्पताल पहुंचा। महिला ने अस्पताल में बच्चे को जन्म दिया। डॉक्टरों के अनुसार, समय पर अस्पताल पहुंचने के कारण मां और नवजात दोनों सुरक्षित हैं।

जवानों को मिली थी सूचना

दरअसल, घटना 27 मार्च की है। बोटेर गांव में तैनात सुरक्षाबल के जवानों को सूचना मिली की एक गर्भवती महिला की हालत गंभीर है। वह प्रसव पीड़ा के कारण तड़प रही है। जिस इलाज की जरुरत है। ऐसे में ITBP की 29वीं बटालियन की एक क्विक रिएक्शन टीम मौके पर पहुंची और महिला का सुरक्षित रेस्क्यू किया।

गांव में जाने का रास्ता नहीं

  • जवानों ने पेश की मानवता की मिसाल

  • प्रसव पीड़ा के कारण तड़प रही थी महिला

  • महिला को लेकर करीब पांच किमी पैदल चले जवानों

  • दुर्गम पहाड़ी में बसा है बोटेर गांव, पहुंच का रास्ता नहीं

  • ओरक्षा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती है महिला

  • एंबुलेंस को अलर्ट पर रखा गया

  • बोटेर गांव कभी नक्सल प्रभावित था। इस गांव में अभी भी पहुंचने के लिए सड़क नहीं है। दुर्गम पहाड़ी में बसे इस गांव में सुरक्षाबल के जवान नक्सल विरोधी अभियान के तहत सर्चिंग अभियान  चला रहे थे। गर्भवती महिला को अस्पताल ले जाने के लिए जवानों ने ओरछा स्थित COB से एंबुलेंस को अलर्ट रहने के लिए कहा था लेकिन रास्ता नहीं होने के कारण एंबुलेंस की टीम वहां नहीं पहुंच सकी।

    जिसके बाद जवानों ने घने जंगल, ऊबड़-खाबड़ पगडंडियां और खड़ी चढ़ाइयों के बीच हाथ से बनाए गए स्ट्रेचर पर महिला को लेटकार करीब 5 किमी तक पैदल चले। जवान महिला को बोटेर और कुदमेल के बीच वहां पहुंचे जहां पहले से एंबुलेंस खड़ी थी। उसके बाद महिला को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ओरछा में भर्ती कराया।

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