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मनोरंजन न्यूज़ : जब फिल्म के हीरो के संग भाग गई डायरेक्‍टर की बीवी, देविका रानी के प्रेमी की PAK में हुई थी गुमनाम मौत...

Abhyuday Bharat News / Mon, Mar 30, 2026 / Post views : 300

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इस एक्ट्रेस को भारतीय सिनेमा की फर्स्ट लेडी कहा जाता था। पति संग एक फिल्म 4 मिनट लंबा विवादित सीन भी दिया था, लेकिन अपनी ही एक फिल्म के हीरो के साथ भाग गई। ये थीं देविका रानी। देविका बाद में कुछ शर्तों पर पति के पास लौटीं, पर प्रेमी की पाकिस्तान में गुमनामी में मौत हो गई। 

पढ़िए कहानी:

यहां आपको एक ऐसी हीरोइन के बारे में बता रहे हैं, जिसे 'फर्स्ट लेडी ऑफ इंडियन सिनेमा' कहा जाता था। उसने उस दौर में फिल्मी दुनिया में कदम रखा, जब हीरोइन बनने या महिलाओं के फिल्मों में काम करने को वेश्यावृत्ति से भी बुरा माना जाता था। यह थीं देविका रानी। वह दादासाहेब फाल्के अवॉर्ड पाने वाली भी पहली कलाकार थीं। देविका रानी ने अपने करियर में सिर्फ 10 साल काम किया, पर कई यादगार फिल्में कीं, अवॉर्ड जीते और खूब विवाद भी झेले। देविका रानी एक बार अपनी ही फिल्म के डायरेक्टर के साथ भाग गई थीं, जबकि वह शादीशुदा थीं,और जिसके साथ भागीं, उसकी बाद में पाकिस्तान में गुमनामी में मौत हो गई थी। इस घटना का देविका और उनके पति की जिंदगी पर बहुत बुरा असर पड़ा। यही नहीं, देविका रानी भारतीय सिनेमा की एक ऐसी अदाकारा रहीं, जिन्होंने एक फिल्म में 4 मिनट लंबा लिपलॉक भी दिया था। उस पर खूब बवाल भी मचा था। देविका रानी ने ऐसा उस दौर में कर दिखाया था, जब महिलाओं के फिल्मों में काम करने और हीरोइन बनने को बुरा समझा जाता था...इतना बुरा कि आदमी ही हीरोइन का रूप धरकर फिल्मों में एक्टिंग करते थे। देविका रानी की 30 मार्च को 118वीं बर्थ एनिवर्सरी पर उनकी जिंदगी के यही दो किस्से सुना रहे हैं।

रईस परिवार में पैदा, हिमांशु राय से मुलाकात-शादी

देविका रानी एक बहुत ही रईस परिवार में पैदा हुई थीं। 9 साल की उम्र में उन्हें इंग्लैंड के बोर्डिंग स्कूल भेज दिया गया और वह वहीं पली-बढ़ीं। साल 1928 में उनकी पहली मुलाकात डायरेक्टर-प्रोड्यूसर हिमांशु राय से हुई। उसी साल दोनों ने शादी कर ली। देविका रानी पति की फिल्मों में कॉस्ट्यूम डिजाइन करने लगीं और आर्ट डायरेक्शन में मदद करने लगीं।

कर्मा' में पति संग 4 मिनट लंबा लिपलॉक-हुआ विवाद

शादी के बाद देविका रानी और हिमांशु राय बर्लिन में रहने चले गए थे, पर बाद में भारत लौटे तो 'कर्मा' नाम से फिल्म बनाई। इसमें देविका हीरोइन थीं, तो हिमांशु राय हीरो बने थे। फिल्म को काफी पसंद किया, पर इसमें देविका और हिमांशु के बीच 4 मिनट लंबा लिपलॉक भी था, जिस पर खूब बवाल मचा। इसी सीन के कारण देविका रानी को 'फर्स्ट लेडी ऑफ इंडियन सिनेमा' का टैग मिल गया। साल 1934 में 'कर्मा' के हिंदी वर्जन को भारत में रिलीज किया गया, पर यह फ्लॉप हो गया। फिर देविका रानी और हिमांशु राय ने मिलकर 'बॉम्बे टाकीज' की स्थापना की, जिसके बैनर तले उन्होंने कई फिल्में बनाईं। उन्होंने पहली फिल्म साल 1935 में बनाई, जिसका नाम 'जवानी की हवा' था। इसमें देविका के ऑपोजिट नज्म-उल-हसन हीरो थे।

नज्म-उल-हसन संग काम करते हुए प्यार, उनके साथ भागीं देविका

इसके बाद हिमांशु राय ने देविका रानी और नज्म-उल-हसन को लेकर दूसरी फिल्म 'जीवन नैया' बनाई। इसी फिल्म के दौरान देविका और नज्म-उल-हसन के बीच नजदीकियां बढ़ने लगीं और प्यार हो गया। हिमांशु राय को इसकी भनक लगी, तो वह गुस्से से आगबबूला हो गए और फिल्म की शूटिंग बीच में रोक दी। उन्हें लगा कि देविका और नज्म इससे दूर हो जाएंगे, पर हुआ उल्टा ही। देविका तो नज्म-उल-हसन के साथ भाग गईं। किसी को पता ही नहीं चला कि वह कहां गईं। फिल्म रुकी तो हिमांशु राय के पैसे भी डूब गए। हिमांशु राय को खूब बदनामी का सामना करना पड़ा और बॉम्बे टॉकीज भी दिवालिया होने की स्थिति में पहुंच गया।

हिमांशु राय ने देविका की करवाई तलाश, कलकत्ता में रह रही थीं

तब हिमांशु राय ने अपने विश्वासपात्र सशधर मुखर्जी को देविका रानी की तलाश करने भेजा। सशधर मुखर्जी को कुछ ही दिन में देविका और नज्म के बारे में खबर मिली। पता चला कि वो कलकत्ता में हैं। सशधर मुखर्जी वहीं पहुंच गए और देविका को खूब समझाने की कोशिश की। वह किसी तरह देविका को समझाकर वापस मुंबई ले आए। देविका, सशधर मुखर्जी को भाई मानती थीं, और वह उनकी बात को टाल नहीं सकीं।

पति को तलाक दिए बिना ही प्रेमी संग रह रही थीं

देविका पति का तलाक दिए बिना ही नज्म-उल-हसन के साथ रह रही थीं, और उस दौर में इसे सही नहीं माना जाता था। ऐसा करने वाली औरतों को भी गलत नजरों से देखा जाता था। देविका रानी लौट तो आईं, पर पति हिमांशु राय के सामने कई शर्तें रख दीं। जैसे कि वह फिल्म की फीस लेंगी और घर का सारा खर्च हिमांशु उठाएंगे। वह राजी हो गए।

नज्म-उल-हसन को फिल्म से निकाला, पाकिस्तान चले गए, गुमनामी में मौत

हिमांशु राय ने देविका रानी के साथ अपनी रुकी फिल्म 'जीवन नैया' की शूटिंग दोबारा शुरू की, पर इस बार हीरो अशोक कुमार को लिया। नज्म-उल-हसन को उन्होंने बॉम्बे टॉकीज और फिल्म से बाहर निकाल दिया। इसके बाद नज्म-उल-हसन का करियर गर्त में जाने लगा। उन्हें फिल्में तो मिल रही थीं, पर वो खास नहीं चलीं। फिर जब 1947 में भारत-पाकिस्तान का विभाजन हुआ, तो नज्म-उल-हसन पाकिस्तान चले गए। वहां उन्होंने फिल्मों में काम करना जारी रखा, पर लीड रोल नहीं मिले। ऐसे में सपोर्टिंग किरदारों से ही संतुष्टि करनी पड़ी। और फिर अचानक एक दिन नज्म-उल-हसन की पाकिस्तान में गुमनाम मौत हो गई।

1949 में हिमांशु राय और 1994 में देविका रानी की मौत

वहीं, 1949 में देविका रानी के पति हिमांशु राय की भी मौत हो गई। इसके बाद देविका रानी ने मुंहबोले भाई शशधर मुखर्जी के साथ मिलकर 'बॉम्बे टॉकीज' संभाला और कई फिल्में बनाईं। साल 1994 में देविका रानी की भी मौत हो गई। तब वह 85 साल की थीं।

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