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मनोरंजन न्यूज़ : पति पत्‍नी और वो दो' मूवी रिव्‍यू

Abhyuday Bharat News / Fri, May 15, 2026 / Post views : 259

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बॉलीवुड में कॉमेडी ऑफ एरर्स जैसे जॉनर के लिए पति पत्नी और वो वाला एंगल हमेशा से फिल्मकारों का पसंदीदा रहा है। यही वजह है कि इस जॉनर को भुनाने के लिए 'रंग बिरंगी', 'पति पत्नी और वो', 'बीवी नंबर वन', 'घरवाली बाहरवाली', 'साजन चले ससुराल' जैसी कई फिल्में बनी हैं। इसी तर्ज पर 2019 में मुद्दसर अजीज निर्देशित कार्तिक आर्यन स्‍टारर 'पति पत्नी और वो' भी आई थी, जो खूब हिट रही। अब उसी सफलता को कैश करने के लिए मुद्दसर अजीज इसका सीक्‍वल 'पति पत्नी और वो दो' लेकर आए हैं। लेकिन अफसोस कि कमजोर स्क्रिप्ट, लाउड कॉमेडी और लॉजिक की कमी के कारण यह हंसने-हंसाने वाली फिल्म एक फैमिली एंटेरेननर बनने से चूक गई।

'पति पत्‍नी और वो दो' की कहानी

कहानी प्रयागराज के फॉरेस्ट विभाग के इंचार्ज प्रजापति पांडे (आयुष्मान खुराना) के इर्द-गिर्द घूमती है, जो अपनी महत्वाकांक्षी पत्रकार पत्नी अपर्णा (वामिका गब्बी) से बेहद प्यार करता है। अपर्णा अपना खुद का न्यूज चैनल शुरू करने का सपना देख रही है, जबकि उनकी करीबी दोस्त नीलोफर (रकुल प्रीत सिंह) प्रजापति के ही विभाग में काम करती है। तीनों की जिंदगी आराम से चल रही होती है, तभी बनारस से प्रजापति की पुरानी दोस्त चंचल (सारा अली खान) मदद मांगने आ पहुंचती है।

असल में चंचल बाहुबली नेता गजराज सिंह (तिग्मांशु धूलिया) के बेटे से प्यार करती है, लेकिन उसकी जाति उनके रिश्ते की सबसे बड़ी रुकावट बन जाती है। अपने प्रेमी के साथ भागने के लिए उसे कुछ दिनों का वक्त चाहिए, इसलिए वह प्रजापति से अपना नकली बॉयफ्रेंड बनने की गुजारिश करती है। मजबूरी में शुरू हुई यह झूठी प्रेम कहानी जल्द ही गलतफहमियों, झूठ और मजेदार कन्फ्यूजन का ऐसा जाल बन जाती है, जिसमें सिर्फ प्रजापति और चंचल ही नहीं, बल्कि अपर्णा, नीलोफर और कहानी के बाकी किरदार भी उलझते चले जाते हैं।

पति पत्‍नी और वो दो' का ट्रेलर


'पति पत्‍नी और वो दो' मूवी रिव्‍यू

निर्देशक मुद्दसर अजीज की यह सीक्वल एक साफ-सुथरी फैमिली कॉमेडी का वादा करती है और कुछ हद तक उस पर खरी भी उतरती है। फिल्म में कई बेतुके, लेकिन मनोरंजक दृश्य हैं, जो हंसाते हैं। हालांकि कहानी की बुनियादी कमजोरियां इसे पूरी तरह असरदार बनने से रोक देती हैं। फिल्म की शुरुआत दिलचस्प अंदाज में होती है, लेकिन पहला भाग काफी सपाट और धीमा महसूस होता है। सेकंड हाफ में कहानी रफ्तार पकड़ती है और कॉमेडी ऑफ एरर्स से पैदा होने वाला कन्फ्यूजन कई जगह दर्शकों को हंसाने में कामयाब रहता है।

डायलॉग्‍स में प्रयागराज का देसी फ्लेवर अच्छा लगता है और कुछ वन-लाइनर्स सचमुच मजेदार बन पड़े हैं। हालांकि पूरी फिल्म का ट्रीटमेंट कई जगह जरूरत से ज्यादा लाउड महसूस होता है। निर्देशक किरदारों को अपेक्षित गहराई नहीं दे पाए हैं, जिसकी वजह से इमोशनल हिस्से असर छोड़ने में कमजोर पड़ जाते हैं।

संगीत की बात करें तो कई संगीतकारों की मौजूदगी के बावजूद सिर्फ ‘हमने दिल वहीं लगाया’ और ‘रूप दी रानी’ जैसे गाने ही याद रह जाते हैं। केतन सोढा का बैकग्राउंड स्कोर कई सीन्‍स में जरूरत से ज्यादा तेज सुनाई देता है। जबकि जिश्नु भट्टाचार्जी की सिनेमैटोग्राफी औसत रहती है। फिल्म में कई जगह लॉजिक की कमी जरूर खलती है, लेकिन दो घंटे से कम का इसका रनटाइम इसे बोझिल होने से बचा लेता है और मनोरंजन का प्रवाह बनाए रखता है।

अभिनय की बात की जाए, तो पूरी फिल्म आयुष्मान खुराना के कंधों पर है, जिसे उन्होंने अपनी कमाल की कॉमिक टाइमिंग से मजबूती से उठाया है। प्रजापति के किरदार में उनकी स्लैपस्टिक कॉमेडी मजेदार साबित होती है। अपर्णा के रोल में वामिका को फिल्म में अच्छा-खासा स्क्रीन टाइम मिला है, जिसका उन्होंने पूरा फायदा उठाकर अपनी भूमिका को यादगार बनाया है। सारा अली खान भी चंचल की नौटंकी करने वाली भूमिका में एकदम फिट बैठी हैं। उनका ओवर द टॉप अंदाज किरदार पर हर तरह से सजता है। रकुल प्रीत ने भी नीलोफर की भूमिका के साथ पूरा न्याय किया है।

सहयोगी कास्ट में विजय राज, तिग्मांशु धूलिया और विजय वशिष्ट मनोरंजन के पलों में इजाफा करते हैं, मगर बुआ जी के रोल में आयशा रजा खूब हंसाती हैं।

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#Films News

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