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उत्तर प्रदेश :-मथुरा न्यूज : मथुरा होली :- 20 फीट ऊंची आग की लपटों को चीरकर निकले संजू पंडा, फिर जीवंत हुई 'प्रह्लाद' की लीला

Abhyuday Bharat News / Tue, Mar 3, 2026 / Post views : 281

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बताया जाता है कि मथुरा के फालैन गांव में 5200 सालों ये परंपरा चली आ रही है। संजू पंडा के पिता सुशील पंडा आठ बार और भाई मोनू पंडा चार बार जलती हुई होलिका से सुरक्षित निकल चुके हैं।

मथुरा: ब्रज की होली केवल रंगों का खेल नहीं, बल्कि अटूट विश्वास की कसौटी भी है। मंगलवार तड़के करीब 4 बजे जब कोसीकलां के फालैन गांव में होलिका की लपटें आसमान छू रही थीं, तब संजू पंडा ने दहकते अंगारों के बीच से दौड़ लगाकर सबको हैरत में डाल दिया। ताज्जुब की बात यह रही कि इतनी भीषण आग के बावजूद संजू का शरीर बिल्कुल नहीं झुलसा। गांव फलन की यह परंपरा करीब 5200 वर्षों पुरानी मानी जाती है।

संजू पांडा पिछले 45 दिनों से प्रह्लाद मंदिर में कठिन तपस्या कर रहे थे। उन्होंने जमीन पर सोकर और केवल फलाहार लेकर ब्रह्मचर्य का पालन किया। परंपरा के अनुसार, होलिका दहन से पहले उन्होंने मंदिर की ज्योति पर हाथ रखकर देवी संकट का इंतजार किया। जैसे ही उन्हें ज्योति में शीतलता महसूस हुई, उन्होंने आग में प्रवेश का इशारा कर दिया।

प्रह्लाद की शक्ति और आत्म बल

आग से निकलने के बाद संजू पांडा ने कहा यह मेरा चमत्कार नहीं साक्षात् प्रह्लाद जी की कृपा है। जब मैं आग में होता हूं तो बाल रूप में प्रभु प्रह्लाद मेरे आगे चलते हैं और मुझे आग महसूस नहीं होती है। संजू की बहन रजनी ने जलती हुई होली पर कलश से अर्ध्य देकर जल की धार दी जिसके बाद संजू प्रह्लाद कुंड में स्नान कर सीधे आग की लपटों में कूद गए।

संजू पंडा

यह मेरा चमत्कार नहीं साक्षात् प्रह्लाद जी की कृपा है। जब मैं आग में होता हूं तो बाल रूप में प्रभु प्रह्लाद मेरे आगे चलते हैं और मुझे आग महसूस नहीं होती है।

विदेशी मेहमान देखकर रह गए दंग

इस अलौकिक दृश्य को देखने जर्मनी, इंग्लैंड, ऑस्ट्रेलिया जैसे कई देशों से विदेशी पर्यटक भी पहुंचे और दंग रह गए। विज्ञान के जानकारों के अनुसार, यह आज भी एक अनसुलझी पहेली है, लेकिन ग्रामीण इसे भगवान नरसिंह का वरदान मानते हैं जिसे प्रह्लाद जी के वंशज निभाते आ रहे हैं।


सतयुग से चली जा रही परंपरा

गांव फलन की यह परंपरा करीब 5200 वर्षों पुरानी मानी जाती है। मान्यता है कि इसी स्थान पर भक्त प्रह्लाद को जलाने की कोशिशें विफल हो गई थीं। संजू के परिवार की कई पीढ़ियां इसे परंपरागत तौर पर निभाती चली आ रही हैं। इससे पहले उनके पिता सुशील पांडा आठ बार और बड़े भाई मोनू पांडा 4 बार जलती हुई होली से सुरक्षित निकल चुके हैं।

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