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उत्तर प्रदेश :- मथुरा न्यूज : सफेद छतरी में विराजीं राधारानी, नम आंखों और अगले बरस की आस के साथ ब्रज होली का समापन....

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Abhyuday Bharat News / Fri, Mar 6, 2026 / Post views : 243

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बरसाना के इलाकों में 40 दिनों से चल रहा होली महोत्‍सव अब समाप्‍त हो गया है। अंतिम दिन भी दूरदराज से आए श्रद्धालुओं का उत्‍साह देखते ही बन रहा था।

मथुरा: ब्रजमंडल में बसंत पंचमी से शुरू हुआ 40 दिवसीय विश्वप्रसिद्ध होली महोत्सव अपनी पूरी दिव्यता और परंपरा के साथ खत्‍म हो गया। उत्सव के अंतिम दिन बरसाना के श्रीजी मंदिर में एक ऐसा दृश्य देखने को मिला, जिसकी प्रतीक्षा भक्त पूरे वर्ष करते हैं। वृषभान नंदिनी राधारानी अपने गर्भगृह से बाहर निकलकर मंदिर परिसर में स्थित संगमरमर की सफेद छतरी में विराजमान हुईं और हजारों भक्तों पर अपनी कृपा दृष्टि डाली।

परंपरा के अनुसार, साल में कुछ विशेष महोत्सवों पर ही राधा रानी गर्भगृह से बाहर आती हैं। होली के समापन पर लाडली जी के डोले को सेवायतों ने अपने कंधों पर उठाकर सफेद छतरी पहुंचाया। सफेद संगमरमर की इस छतरी में राधा कृष्ण के युगल स्वरूप के दर्शन पाकर श्रद्धालु भाव विभोर हो उठे। मंदिर परिसर राधे राधे के जयकारों से गूंज उठा।


'जो जीवैगो सो खेलेगौ...विदाई का भावुक संदेश

बरसाना मे होली समापन केवल रंगों का अंत नहीं बल्कि जीवन की नश्वरता और ईश्वर के प्रति अटूट विश्वास का संगम है। गोस्वामी समाज द्वारा समाज गायन का अंतिम पद गाया गया। "जो जीवैगो सो खेलेगौ, ढप धर दै यार गई अगली बरस की।" इस पद के गायन के साथ ही मृदंग और झांझ जैसे वाद्ययंत्रों को विधिवत समेटकर अगले वर्ष के लिए सुरक्षित रख दिया गया। इस रस्म का अर्थ यह है कि अब होली का समय बीत चुका है और जो अगले वर्ष तक जीवित रहेगा, वही फिर से इस आनंद को प्राप्त करेगा।


कन्याओं ने उतारी आरती

करीब 2 घंटे तक संगमरमर की सफेद छतरी में दर्शन देने के बाद सेवायत डोले को दोबारा मंदिर के मुख्य गर्भगृह ले गए। इसके बाद गोस्वामी समाज की कन्याओं द्वारा विशेष आरती की गई।


बृज भक्ति और उल्लास का संगम

40 दिनों तक चलने वाले इस रंगोत्सव में फाग,धमार और राधा कृष्ण की लीलाओं का जो रस बहा, उसने हर श्रद्धालु को भक्ति के रंग में सराबोर कर दिया। अंतिम दिन भी श्रद्धालुओं का उत्साह देखते ही बन रहा था। हर कोई श्यामा प्यारी की एक झलक पाने को बेताब नजर आया।

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