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उत्तर प्रदेश :- आगरा न्यूज : आगरा: पुलिस हिरासत में बेटे की हुई थी मौत, 7 साल बाद मां को मिला न्याय, कोर्ट ने दरोगा को सुनाई ये सजा...

Abhyuday Bharat News / Fri, Mar 20, 2026 / Post views : 120

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आगरा में पुलिस हिरासत हुई मौत के 7 साल 3 महीने और 27 दिन बाद उस मां को न्याय मिला है, जो अब इस दुनिया में नहीं है। उसके बेटे की पुलिसकर्मियों की यातना से हिरासत में मौत हो गई थी।

आगरा: पुलिस हिरासत हुई मौत के 7 साल 3 महीने और 27 दिन बाद उस मां को न्याय मिला है, जो अब इस दुनिया में नहीं है। उसके बेटे की पुलिसकर्मियों की यातना से हिरासत में मौत हो गई थी। बेटे को इंसाफ दिलाने के लिए मां ने लंबी लड़ाई लड़ी। उसे प्रलोभन भी दिया गया, लेकिन वह अपने बेटे के हत्यारों को छोड़ना नहीं चाहती थी।

गुरुवार को एडीजे -17 नितिन कुमार ठाकुर की अदालत ने दरोगा अनुज सिरोही और बेटे पर चोरी का आरोप लगाने वाले अंशुल प्रताप सिंह को दोषी ठहराया है। कोर्ट ने अनुज को 10 साल और अंशुल को 7 साल की सजा सुनाई है। साथ ही जांच करने वाले अधिकारी सीओ चमन सिंह चावड़ा और निरीक्षक राजेश कुमार पांडे के खिलाफ विभागीय जांच के आदेश दिए हैं।


मामला जानिए

ये मामला 21 नवंबर 2018 का है। थाना सिकंदरा क्षेत्र के नरेंद्र एनक्लेव में राजू गुप्ता अपनी मां रेनुलता के साथ किराए के मकान में रहता था। उनके पड़ोस में रहने वाले अंशुल प्रताप ने राजू पर आभूषणों से भरे बैग की चोरी करने का आरोप लगाया था। अंशुल और उसके साथी विवेक ने राजू को अपने घर में बंधक बना लिया और पुलिस को सूचना दे दी। पुलिस राजू को थाने ले गई। वहां हिरासत में रखकर बेरहमी से पिटाई लगाई। राजू की मां रेनू लता भी थाने पहुंच गई थी। उसके सामने ही राजू की डंडों से पिटाई लगाई और उसे करंट लगाया गया।

पुलिस की याताना से दूसरे दिन राजू की तबीयत बिगड़ गई। उसे अस्पताल ले जाया गया, लेकिन तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। पोस्टमार्टम में उसके शरीर पर चोटों के कई निशान मिले। राजू की मौत से वैश्य समाज के लोगों में उबाल आ गया। सड़क पर उतर कर आंदोलन किए। पुलिस और प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। आंदोलन के चलते अंशुल प्रताप उसके साथी विवेक और अज्ञात पुलिसकर्मियों पर हत्या का केस दर्ज किया गया था।

पुलिस अधिकारियों ने लापरवाही की थी

मामले की विवेचना तत्कालीन थाना प्रभारी राजेश पांडेय से कराई गई। विवेचक ने दरोगा अनुज सिरोही, अंशुल प्रताप और विवेक के खिलाफ गैर इरादतन हत्या में चार्जशीट लगाई थी। इसके बाद मुकदमे की विवेचना मानवाधिकार आयोग के निर्देश पर सीआईडी को ट्रांसफर की गई थी। कोर्ट ने माना कि विवेचना में पुलिस अधिकारियों लापरवाही की थी। कोर्ट ने प्रदेश के गृह सचिव और पुलिस आयुक्त को निर्देश दिए हैं कि जांच अधिकारी सीओ चमन सिंह चावड़ा और थाना लोहामंडी प्रभारी रहे राजेश कुमार पांडेय के खिलाफ सेवा नियम के तहत विभागीय जांच की जाए।

10 साल की सजा

कोर्ट ने दरोगा अनुज सिरोही को दोषी मानते हुए उसे 10 साल सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही अंशुल प्रताप को 7 साल की सजा सुनाई है। विवेक को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया है। दोनों आरोपियों पर 10-10 हजार का अर्थदंड भी लगाया है।

मां के सामने लगाया करंट

राजू की मौत के बाद उनकी मां रेनू लता पूरी तरह से टूट चुकी थी लेकिन वह अपने बेटे को इंसाफ दिलाना चाहती थी। उन्होंने पुलिस को बताया था कि घटना से दो दिन पहले पड़ोसी अंशुल प्रताप सिंह हरिद्वार जाने की तैयारी कर रहे थे। वह अपना सामान रख रहे थे। उसे दौरान बेटा राजू उनके घर पर बैठकर टीवी देख रहा था। हरिद्वार से लौटने के बाद अंशुल प्रताप ने राजू को फोन करके घर बुलाया और उस पर चोरी का आरोप लगाया था।

राजू को मारा पीटा गया और पुलिस को सूचना दी गई। पुलिसकर्मी राजू को थाने ले गए उसके पीछे-पीछे वह भी चली गई। रेनू लता ने बताया था कि राजू को बिना एफआईआर दर्ज किए हिरासत में रखा गया। उसे डंडों से पीटा गया। थर्ड डिग्री देते हुए उसे करंट लगाया गया। जब उसकी मौत हो गई तो उन्हें घर भेज दिया गया था।


पुलिस ने बेटे को प्यासा भूखा रखा था

बेटे की मौत रेनुलता टूट चुकी थीं। उन्होंने बताया था कि पुलिस ने उनके बेटे को भूखा प्यासा रखा था। पिटाई और थर्ड डिग्री से उसकी मौत हो गई। बेटे को न्याय दिलाने के लिए उन्होंने लंबा संघर्ष किया। अधिकारियों के दिए बयान में उन्होंने वह सब बताया था जो उन्होंने देखा था। बेटे की हत्या का केस तो दर्ज हो गया था, लेकिन उसमें किसी पुलिसकर्मी को शामिल नहीं किया गया था।

वैश्य संगठनों के आंदोलन के बाद थाना प्रभारी और दरोगा को निलंबित किया गया। मगर दोषियों पर कार्रवाई नहीं होने से रेनूलता टूट गई थी। वह दूसरी जगह रहने आ गईं। इसके बाद कोरोना काल में उनकी मौत हो गई।

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#uttarpradesh

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