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दिल्ली न्यूज़ : दिल्ली के 650 करोड़ के कथित स्वास्थ्य घोटाले में नया खुलासा, एक ही परिवार की 3 फर्मों से खरीदी गईं चादरें

Abhyuday Bharat News / Tue, Jul 7, 2026 / Post views : 239

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दिल्ली में स्वास्थ्य उपकरण एवं दवाओं की खरीद के नाम पर हुए कथित 650 करोड़ रुपये के घोटाले की जांच में नया खुलासा हुआ है। एंटी करप्शन ब्रांच (ACB) की जांच में सामने आया है कि सरकारी अस्पतालों के लिए चादरों की खरीद एक ही परिवार से जुड़ी तीन अलग-अलग फर्मों के जरिए की गई। आरोप है कि इन चादरों की खरीद बाजार कीमत से करीब तीन गुना अधिक दर पर की गई, जिससे सरकारी खजाने को करोड़ों रुपये का नुकसान पहुंचा। जांच एजेंसी के अनुसार, खरीद प्रक्रिया में कथित तौर पर नियमों की अनदेखी की गई और टेंडर प्रक्रिया को कुछ चुनिंदा फर्मों के पक्ष में तैयार किया गया। इससे प्रतिस्पर्धा प्रभावित हुई और ऊंची कीमतों पर सामान की खरीद संभव हो सकी।

जांच के दौरान चादरों की खरीद में भारी अनियमितताओं का दावा किया गया है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, सेंट्रल प्रोक्योरमेंट एजेंसी (सीपीए) और स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय की कथित मिलीभगत से खरीद प्रक्रिया को अंजाम दिया गया। जांच में सामने आया है कि जिन चादरों की आपूर्ति देश के प्रमुख अस्पताल एम्स को करीब 150 रुपये प्रति चादर की दर से की जा रही थी, वही चादरें दिल्ली सरकार के अस्पतालों के लिए 450 रुपये प्रति चादर की दर से खरीदी गईं। इस खरीद पर कुल 75 करोड़ रुपये खर्च किए गए। आरोप है कि यह खरीद तीन फर्मों के माध्यम से की गई, जबकि तीनों फर्में एक ही परिवार से जुड़ी हुई थीं।

एसीबी के अनुसार, खरीद प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं भी सामने आई हैं। आरोप है कि एक ही दिन में टेंडर जारी किया गया, खरीद को मंजूरी दी गई और चादरों की आपूर्ति भी दिखा दी गई। इसके अगले ही दिन संबंधित फर्मों को 75 करोड़ रुपये का भुगतान कर दिया गया। जांच एजेंसी का दावा है कि 75 करोड़ रुपये के भुगतान में से करीब 25 करोड़ रुपये चादरों की वास्तविक कीमत थी, जबकि शेष 50 करोड़ रुपये कथित तौर पर कमीशन के रूप में बांटे गए। आरोप है कि इस राशि का बंटवारा मामले के आरोपी एवं सामान आपूर्ति करने वाले राजीव रंगीला और कथित रूप से शामिल अधिकारियों के बीच हुआ।

बिना टेंडर 400 करोड़ की दवाएं खरीदीं; 300 करोड़ की रिश्वत बांटने का आरोप

ACB की जांच के दौरान सामने आया है कि सेंट्रल प्रोक्योरमेंट एजेंसी (CPA) ने दवाओं की खरीद के लिए कोई टेंडर जारी नहीं किया। आरोप है कि दवाओं की आपात आवश्यकता का हवाला देकर अधिकारियों ने अपने स्तर पर ही करीब 400 करोड़ रुपये की दवाओं की खरीद कर ली। इस खरीद प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी की गई और प्रतिस्पर्धी निविदा प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। जांच एजेंसी का दावा है कि इस खरीद से जुड़े मामले में आरोपी राजीव कुमार रंगीला ने कथित तौर पर करीब 300 करोड़ रुपये रिश्वत के रूप में विभिन्न लोगों के बीच बांटे। जांच एजेंसी के मुताबिक, राजीव कुमार रंगीला फिलहाल फरार है। उसकी तलाश में एसीबी लगातार छापेमारी कर रही है। हाल ही में उसकी गिरफ्तारी के लिए उसके आवास पर भी छापा मारा गया, लेकिन वह वहां नहीं मिला।

फर्जी टर्नओवर और शेल फर्मों के इस्तेमाल का आरोप

टेंडर प्रक्रिया में शामिल कई फर्मों ने पात्रता के लिए फर्जी दस्तावेजों का सहारा लिया। टेंडर की शर्तों के अनुरूप कोई भी फर्म या कंपनी वास्तविक रूप से पात्र नहीं थी। आरोप है कि सामान की आपूर्ति करने वाली कई फर्मों का टर्नओवर फर्जी तरीके से अधिक दिखाया गया, ताकि वे टेंडर की पात्रता पूरी कर सकें। जांच एजेंसी का यह भी दावा है कि टेंडर प्रक्रिया में प्रतिस्पर्धा का दिखावा करने के लिए फर्जी या कागजी फर्मों का इस्तेमाल किया गया। इन फर्मों को केवल औपचारिक प्रतिस्पर्धा दिखाने के उद्देश्य से निविदा प्रक्रिया में शामिल किया गया, जबकि वास्तविक लाभ कुछ चुनिंदा कंपनियों को पहुंचाया गया।

15 दिन की प्रारंभिक जांच के बाद दर्ज हुई FIR

स्वास्थ्य उपकरण एवं दवाओं की खरीद से जुड़े कथित 650 करोड़ रुपये के घोटाले में FIR दर्ज करने से पहले दिल्ली सरकार ने करीब 15 दिनों तक अपने स्तर पर प्रारंभिक जांच कराई थी। जांच के दौरान खरीद प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं के संकेत मिलने के बाद मामले को आगे बढ़ाया गया। प्राथमिक जांच में गड़बड़ियां सामने आने के बाद विजिलेंस विभाग ने सेंट्रल प्रोक्योरमेंट एजेंसी (सीपीए) पर छापेमारी की। इसके बाद ACB ने मामले में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की। एसीबी ने जांच के दौरान दो डॉक्टरों को गिरफ्तार भी किया है। जांच एजेंसी अब खरीद प्रक्रिया, टेंडर, भुगतान और संबंधित अधिकारियों व निजी फर्मों की भूमिका की विस्तृत पड़ताल कर रही है।

मानव चेन बनाकर AAP का मौन प्रदर्शन

स्वास्थ्य उपकरण एवं दवा खरीद से जुड़े कथित घोटाले के विरोध में सोमवार को आम आदमी पार्टी (AAP) ने राजधानी में मौन सांकेतिक प्रदर्शन किया। पार्टी के कार्यकर्ताओं ने एलएनजेपी अस्पताल के बाहर लंबी मानव शृंखला बनाकर विरोध दर्ज कराया। यह प्रदर्शन दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज के नेतृत्व में आयोजित किया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता शामिल हुए और मौन रहकर अपना विरोध जताया। पार्टी नेताओं ने आरोप लगाया कि स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े इस मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और यदि किसी स्तर पर अनियमितता हुई है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।

 भाजपा का पलटवार, बोली- AAP सरकार में अहम पदों पर रहीं डॉ. वत्सला

स्वास्थ्य उपकरण एवं दवा खरीद से जुड़े कथित घोटाले को लेकर जारी सियासी आरोप-प्रत्यारोप के बीच दिल्ली भाजपा ने आम आदमी पार्टी पर पलटवार किया है। भाजपा का दावा है कि आम आदमी पार्टी की सरकार के दौरान डॉ. वत्सला तीन सरकारी अस्पतालों और एक चिकित्सा निकाय की प्रमुख रह चुकी हैं। भाजपा नेताओं ने कहा कि डॉ. वत्सला का इन महत्वपूर्ण पदों पर कार्य करना इस बात का संकेत है कि उनकी तत्कालीन अरविंद केजरीवाल और आतिशी सरकारों से नजदीकी रही। पार्टी ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा कि जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।

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