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: बिलासपुर : कलेक्टर अवनीश शरण के आदेश पर 6 महीना बाद भी जाँच पूरी नहीं, रीपा प्रोजेक्ट के तहत मशीनरी उपकरण खरीदी में भ्रष्टाचार का मामला……

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ABN EXPRESS NEWS 24x7 कांग्रेस शासन काल में रीपा प्रोजेक्ट के तहत रानीगांव पर किया गया भ्रष्टाचार, जाँच प्रतिवेदन प्राप्त होने के बाद निर्णय लेने में रुचि क्यों नहीं ले रहे जिला पंचायत सीईओ आरपी चौहान ? बिलासपुर – जनपद पंचायत कोटा के अंतर्गत ग्राम पंचायत रानी गांव में रीपा प्रोजेक्ट के तहत मशीनरी उपकरण खरीदी किए गए भ्रष्टाचार के संबंध में जिला कलेक्टर अवनीश शरण को शिकायत किया गया था. जिसके जांच के लिए जिला पंचायत बिलासपुर को जिम्मेदारी दी गई. उक्त जांच को पूरा करने के लिए 4 सदस्य दल का गठन किया गया रहा. लेकिन वही शिकायत को 6 माह बीत जाने के बाद भी जांच प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाई है. रीपा प्रोजेक्ट के तहत उपकरण खरीदी में किए गए भ्रष्टाचार को लेकर 12 फरवरी 2024 को जिला कलेक्टर बिलासपुर को शिकायत किया गया. उक्त शिकायत पर उल्लेख किया गया कि जनपद पंचायत कोटा के अंतर्गत रानी गांव में रीपा प्रोजेक्ट के तहत स्थापित दुग्ध प्रसंस्करण इकाई यूनिट एवं एच. डी. पी. ई बैग निर्माण इकाई यूनिट मे किए गए मशीनरी उपकरण खरीदी पर भ्रष्टाचार किया गया. कलेक्टर अवनीश शरण द्वारा जिला पंचायत बिलासपुर को जांच प्रक्रिया पूर्ण कर कार्यवाही करने कहा गया. उक्त आदेश के परिपालन पर मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत बिलासपुर आरपी चौहान ने दिनांक – 08-04-2024 को मामले की जांच हेतु 04 सदस्य जाँच दल गठित किया. उक्त जांच दल में महाप्रबंधक जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र बिलासपुर, कार्यपालन अभियंता ग्रामीण यांत्रिकी सेवा संभाग बिलासपुर, डीएमएम – एनआरएलएम जिला पंचायत बिलासपुर, एवं लेखपाल लाईवली हुड कालेज बिलासपुर शामिल रहे. विश्वसनीय सूत्र बताते हैं कि जांच दल ने अपना प्रतिवेदन बनाकर मुख्य कार्यपालन अधिकारी आरपी चौहान जिला पंचायत बिलासपुर को प्रस्तुत कर दिया है. लेकिन श्री चौहान उक्त मामले पर निर्णय लेने पर रुचि नहीं ले रहे यह विचारणीय विषय है. दूसरी ओर अगर मामले पर सूचना का अधिकार के तहत जानकारी प्राप्त करने हेतु आवेदन प्रस्तुत किया जाता है तो जवाब मैं यह लिख कर दिया जाता है कि अभी मामले जांच प्रक्रिया मे है इसलिए जानकारी दिया जाना संभव नहीं है वही मामले पर विश्वसनीय सूत्रों कहना है कि जिला पंचायत सीईओ आरपी चौहान के द्वारा मामले को जानबूझ कर लटकाया जा रहा है . मामले पर चर्चा या हो रही है कि जांच दल द्वारा दिया गया प्रतिवेदन मे भ्रष्टाचार की पुष्टि हो रही है. वहीं दूसरी ओर बात किया जाए तो मामले पर प्रतिवेदन प्राप्त होने के बाद किसी प्रकार की उचित कार्यवाही नहीं होने से श्री चौहान की भूमिका पर सवालिया निशान उठने लगे है जनपद पंचायत कोटा के रानी गांव में रीपा प्रोजेक्ट के तहत उपकरण खरीदी में किए गए भ्रष्टाचार का यह रहा पूरा मामला छत्तीसगढ़ प्रदेश में वर्ष 2018 विधानसभा चुनाव संपन्न होने के बाद कांग्रेस की सरकार बनी थी. उस दरमियान सरकार कि महत्वपूर्ण योजनाओं में महात्मा गांधी रूरल इंडस्ट्रियल पार्क (रीपा ) सम्मिलित रही. इस योजना का उद्देश्य महिलाओं को आत्मनिर्भर व सशक्त बनाना था. उक्त योजना के तहत जिला बिलासपुर के जनपद पंचायत कोटा अंतर्गत ग्राम पंचायत रानी गांव में दुग्ध प्रसंस्करण इकाई यूनिट एवं HDPE बैग निर्माण इकाई यूनिट स्थापित किया गया. और इस यूनिट को संचालित करने के लिए 10 महिलाओं की एक समूह को जिम्मेदारी दि गई.जिसे उन महिलाओ ने बखूबी निभाया दूसरी ओर बात किया जाए उक्त यूनिट पर उपकरण खरीदी की तो योजनाबद्ध तरीके से दोनों यूनिट पर भ्रष्टाचार को अंजाम दिया गया उक्त सामग्री को सप्लाई करने के लिए निविदा प्रक्रिया के उपरांत एक संस्था को दिया गया. असल खेल यहीं से शुरू हुआ. दरअसल जिस दर पर संस्था से उपकरण खरीदी किया जाना बताया जा रहा है वह खुले बाजार से बहुत ही अधिक है सूचना का अधिकार से प्राप्त दस्तावेज के अनुसार एच. डी. पी. ई बैग निर्माण यूनिट के अंतर्गत एस मार्क इंजीनियरिंग बैक कटिंग मशीन को 1 लाख 50 हजार रुपए मे टैक्स सहित खरीदी करना बताया गया जबकि खुले बाजार में इस सामग्री की कीमत मात्र 55 हजार रुपए बताई जा रही है. इस तरह से उक्त उपकरण को असल दर मे ना लेकर 3 गुना दाम देकर क्रय किया गया. इसी तरह पार्थ गब्बर इंजीनियरिंग वूवेन बैग सवाइंग मशीनरी 2 लाख 99 हजार 900 रुपए मे टैक्स सहित क्रय किया गया जिसका बाजार मूल्य मात्र 80 हजार मे उपलब्ध है इस उपकरण को वास्तविक मूल्य से लगभग 4 गुना अधिक दाम देकर खरीदी किया गया. वही स्टेबलाइजर एवं अन्य टूल्स को 1 लाख 75 हजार रुपए में सभी प्रकार के टैक्स सहित क्रय किया गया जबकि मार्केट में उक्त स्टेबलाइजर का वास्तविक मूल्यमात्र 8 हजार बताया जा रहा है. उसके बाद का बचत राशि लगभग 1 लाख 55 हजार अन्य टूल्स के नाम पर खर्च हुए या फिर राशि बंदर बाँट किया गया यह जांच का विषय है. चुकी मीडिया ने जब पड़ताल किया तो उक्त यूनिट पर स्टेबलाइजर के अलावा अन्य जिस सामग्री क्रय का जिक्र किया जा रहा है वहा पर मात्र एक टेबल उपलब्ध रहा जिसका बाजार मूल्य लगभग 5 हजार रुपए बताई जाती है. वही दुग्ध प्रसंस्करण इकाई यूनिट मे ब्लू स्टार कंपनी का रेफ्रिजरेटर को 2 लाख 99 हजार 9सौ रुपए मे टैक्स सहित खरीदी करना बताया गया जबकि खुले बाजार में इस सामग्री की कीमत मात्र 32 हजार रुपए बताई जा रही है. इस तरह से उक्त उपकरण को 8 गुना अधिक दाम देकर क्रय किया गया. इसी तरह खोवा, घी, पनीर मेकिंग मशीन 2,लाख 40 हजार रुपए मे टैक्स सहित क्रय किया गया जिसका बाजार मूल्य 130 लीटर कि कीमत मात्र 85 हजार मे उपलब्ध है इस उपकरण को वास्तविक मूल्य से लगभग 2 गुना अधिक दाम देकर खरीदी किया गया. वही बीएमसी यूनिट एवं मिल्क प्रोसेसिंग यूनिट को 14 लाख 80 हजार रुपए में सभी प्रकार के टैक्स सहित क्रय किया गया जबकि मार्केट में इसकी वास्तविक मूल्य 7 लाख 9 हजार 3 सौ 45 रुपय होना बताया जा रहा है इस तरह से दोगुनी दम पर इस उपकरण को भी खरीदा गया है. मामले पर विश्वसनीय सूत्र बता रहे हैं कि उक्त जांच दल द्वारा दिए गए प्रतिवेदन पर भ्रष्टाचार की पुष्टि हो रही है. इसलिए जिला पंचायत सीईओ मामले को कलेक्टर के समक्ष रखने में कतरा रहे हैं. बहरहाल देखने वाली बात होगी कि आखिर इस भ्रष्टाचार पर कब तक कार्यवाही हो पाती है

संतोष साहू मोबाइल. +919827329895

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