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बिलासपुर न्यूज़ : जगतगुरु अगम दास जी के जयंती अवसर पर रेल हादसे में राहत व मानवता की मिसाल बने युवाओं को किया गया सम्मान

Abhyuday Bharat News / Tue, Dec 9, 2025 / Post views : 758

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सतनाम बड़ा एवं गवर्नमेंट एम्पलाइज वेलफेयर एसोसिएशन के तत्वाधान मे सतनामी समाज के चौथे वंशज गुरु अगम दास जी जो कि समाज के प्रथम संसद, संविधान सभा के सदस्य रहे गुरु अग़मदास जी की जयंती के मुख्य अवसर पर सम्मान समारोह दिवस के रूप में बनाया गया

मानवता की सेवा में समर्पित सतनामी समाज के युवाओं ने एक बार फिर अपनी अदम्य साहस और निस्वार्थ भावना से सभी को प्रेरित किया है। 4 नवंबर 2025 को बिलासपुर और गतौरा के बीच हुई भयावह रेल दुर्घटना में सोनू बघेल व उनकी टीम के युवाओं ने खतरे की परवाह किए बिना यात्रियों की जान बचाई, जो आज भी समाज के लिए एक जीवंत उदाहरण बन चुकी है। इसी बहादुरी को सम्मानित करने के लिए सतनाम बाड़ा विद्याडीह में एक भव्य सम्मान समारोह का आयोजन किया गया, जहां इन साहसी वीर योद्धाओं को हर्षोल्लास के साथ सम्मान किया गया।

यह समारोह महज एक पुरस्कार वितरण नहीं था, बल्कि सतनामी समाज की मूल विचारधारा – 'एक-दूसरे के दुख को अपना दुख मानकर सेवा करने' – की पुनरावृत्ति था। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ के प्रथम सांसद और समाज के प्रेरणास्रोत गुरु अगम दास जी की जन्म जयंती को विशेष रूप से याद किया गया। गुरु जी ने ही छत्तीसगढ़ राज्य के निर्माण की प्रथम मांग उठाई थी, और उनकी यह जयंती सतनामी समाज में 'गुरुओं का सम्मान' के रूप में मनाई जाती है – एक ऐसा पर्व जो मानवता के प्रति समर्पण का प्रतीक है। समारोह के आयोजकों ने इसी भावना को ध्यान में रखते हुए इन युवाओं को इस पावन दिन पर सम्मानित करने का निर्णय लिया, जो समाज को एक नई दिशा प्रदान करता है।

कार्यक्रम में क्षेत्र के प्रमुख जनपद सदस्य ज्वाला प्रसाद बंजारे जी मुख्य अतिथि रहे । उन्होंने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा,सतनामी समाज हमेशा से ही मानवता की सेवा में अग्रणी रहा है आपकी यह बहादुरी न केवल छत्तीसगढ़, बल्कि पूरे देश के लिए प्रेरणा का स्रोत है। समाज को ऐसे ही उत्तम कार्यों के लिए प्रोत्साहित करते रहें,बंजारे जी शिक्षा पर बहुत ही प्रेरणादायक संदेश दिया शिक्षा से ही हमारी सच्ची पहचान है कहा।उन्होंने युवाओं को मोमेंटो एवं प्रमाण पत्र भेंट कर सम्मानित किया,

आसपास के गांवों से पधारे वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ताओं ने अपने उद्बोधनों में सतनामी समाज की गौरवपूर्ण परंपरा को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि 'सतनामी' नाम ही गुरु घासीदास जी की क्रांतिकारी विचारधारा से प्रेरित है – एक ऐसी विचारधारा जो जाति की सीमाओं को तोड़कर मनुष्य को मनुष्य के गौरवपूर्ण जीवन के लिए संघर्ष करने की प्रेरणा देती है। "गुरु घासीदास जी ने कहा था कि सच्ची सेवा ही सच्ची पूजा है। आज यह विचारधारा न केवल छत्तीसगढ़, बल्कि विश्व स्तर पर प्रासंगिक है। इन युवाओं ने ठीक यही किया – खतरे में फंसे लोगों को अपना परिवार मान लिया,"

कार्यक्रम में बाड़ा के छात्र-छात्राओं और हमारे युवा संगठनों का उत्साहजनक योगदान रहा, सतनाम बाड़ा के संचालक गुरुजी बसंत जांगड़े ने युवाओं की प्रशंसा करते हुए कहा,"आपका यह साहस अद्भुत है"! हम आपको सलाम करते हैं। लेकिन याद रखें, साहस के साथ-साथ शिक्षा ही वह धन है जो अमूल्य है। 'विद्या धन से बढ़कर कोई धन नहीं' – इस सिद्धांत को अपनाकर छत्तीसगढ़ और भारत को नई ऊंचाइयों पर ले जाएं। अपनी क्षमताओं से कृतिशीलता दिखाएं और समाज की एक अलग, प्रेरणादायक छवि गढ़ें।"

यह आयोजन न केवल इन साहसी युवाओं का सम्मान था, बल्कि पूरे समाज को एक संदेश – कि सेवा, साहस और शिक्षा से ही हम एक मजबूत राष्ट्र का निर्माण कर सकते हैं।कार्यक्रम में मुख्य रूप से चौवन गेंदले डॉक्टर जीवनलाल घृतलहरे जगजीवन घृतलहरें सुंदरलाल ,दिलहरण गांगीले सौखी लाल भंडारी विद्याडीह गोवर्धन प्रसाद भंडारी कुटेला चेलके सर मटिया गंगाप्रसाद सोनवानी, अमित पाटले अशोक जांगड़े लक्ष्मण जांगड़े कुटेला एवं विद्याडीह के समस्त युवाओं का सराहनिय योगदान रहा मंच संचालन दीप कुमार अंचल के द्वारा किया गया तथा एक साथ सतनाम आरती करने के पश्चात प्रसाद एवं भोजन वितरण किया गया भोजन निर्माण में सतनाम बाड़ा के संचालिका कुसुमलता जांगड़े एवं महिला टीम का विशेष योगदान रहा

सतनाम बाड़ा विद्याडीह

मस्तूरी ,बिलासपुर( छत्तीसगढ़ )

अनिल बघेल कि रिपोर्ट बिलासपुर

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