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छत्तीसगढ़ न्यूज़ : क्या छत्तीसगढ़ में जल, जंगल, जमीन को लेकर अलख जग गई है

Abhyuday Bharat News / Mon, Dec 8, 2025 / Post views : 270

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हां ऐसा हो गया है अलग-अलग जिलों में सुनवाई का तीखा सीधा विरोध इस बात का संकेत है। सबसे पहले सरगुजा जिले के अमेरा ओपन कास्ट कोल माइंस का व्यापक विरोध। फिर रायगढ़ तमनार धौराभाटा मैदान में जिंदल कोयला खदान का तीखा विरोध और तीसरा खैरागढ़ श्री सीमेंट चूना खदान और सीमेंट फैक्ट्री के विरोध में 39 गांव के ग्रामीण एकत्र हुए। असल में यह अस्तित्व की लड़ाई है कोई राजनीतिक नहीं.... आगामी पीढ़ी की सुरक्षा की लड़ाई है

कुछ वर्ष पूर्व हसदेव अरण्य में जिस तरह जल जंगल जमीन को एक तरफ रख कर सब कुछ अदानी को सौंप दिया गया है और विरोध का आवाज को दबाया गया अब उद्योगपतियों के खिलाफ आम जनता हथियार तो नहीं उठा रही गुलेल लेकर खड़ी हो गई।

बीएनएस मैं गुलेल के खिलाफ आर्म एक्ट नहीं लगता और सरकार क्या हर उद्योगपति को अदानी मान लेगी या जो दर्ज अडानी का है वह अन्य उद्योगपतियों को मिल जाएगा। ग्रामीणों का सीधा सवाल है 2 एकड़ के आवाज में एक नौकरी और छत्तीसगढ़ में जोत का औसत रकबा ही दो एकड़ है। ऐसे में यदि दो एकड़ जमीन चली जाए तो पूरी पीढ़ी बर्बाद हो जाएगी घर की एकता, किसान होने का फक्र सब खत्म नौकरी से वेतन के अतिरिक्त क्या प्राप्त होगा। विस्थापन की चोट अलग साथ ही एक खदान से आसपास का कोई 100 एकड़ पर्यावरण खत्म और इस सब की कीमत एक नौकरी। जब एनटीपीसी आया था तब से लेकर अब तक परिस्थितियों बहुत बदल चुकी है। इसलिए हम कहते हैं जल जंगल जमीन के पक्ष में उसे बचाने हर स्वाभिमानी मातृभूमि का रखवाला छत्तीसगढ़ का खड़ा होगा।

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