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बता दें कि 15 साल बाद बंगाल में टीएमसी और ममता बनर्जी का किला ढहने के बाद अभिषेक बनर्जी को एक तरफ, जहां जनता के गुस्से का सामना करना पड़ रहा है। वहीं दूसरी तरफ फर्जी हस्ताक्षर और लैंड घोटाले में ईडी समेत कई जांच एजेंसियों के रडार पर हैं। जांच एजेंसियां उनसे लगातार पूछताछ कर रही है। अब उनके खिलाफ कई कानूनी मोर्चे भी खुल गए हैं।

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के जस्टिस प्रमोद कुमार अग्रवाल की सिंगल बेंच ने अभिषेक बनर्जी की गिरफ्तारी याचिका पर लगी रोक हटा दी है। हाईकोर्ट ने 12 नवंबर 2025 को मिले स्टे को हटा दिया। अदालत ने कहा, ‘पहले चरण में भी याचिकाकर्ता की ओर से कोई पेश नहीं हुआ। ऐसा प्रतीत होता है कि याचिकाकर्ता की इस याचिका की कार्यवाही में कोई दिलचस्पी नहीं है। याचिकाकर्ता के पक्ष में दिए गए स्टे को भी हटाया जा रहा है। हाईकोर्ट ने 12 नवंबर 2025 को पारित आदेश के जरिए MPMLA कोर्ट द्वारा जारी गिरफ्तारी के निष्पादन पर लगी रोक को तत्काल प्रभाव से हाई कोर्ट ने समाप्त कर दिया है।
अभिषेक बनर्जी की हो सकती है गिरफ्तारी
अब मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की जबलपुर बेंच ने अभिषेक बनर्जी के खिलाफ जारी अरेस्ट वारंट पर लगी रोक को हटा दिया है। इससे बनर्जी की गिरफ्तारी का रास्ता साफ हो गया है। मध्य प्रदेश पुलिस जल्द ही पश्चिम बंगाल जाकर उन्हें गिरफ्तार कर सकती है। यह भी संभव है कि एमपी पुलिस के ऐक्शन से पहले वह सुप्रीम कोर्ट जाकर राहत की मांग करें।
ये पूरा मामला नवंबर 2020का है। कोलकाता में आयोजित एक राजनीतिक सभा के दौरान अभिषेक बनर्जी ने कैलाश विजयवर्गीय के पुत्र आकाश विजयवर्गीय को अपशब्द कहा था। इसके खिलाफ आकाश विजयवर्गीय ने भोपाल के MPMLA कोर्ट में शिकायत दायर किया था। आकाश विजयवर्गीय द्वारा दायर केस की सुनवाई करते हुए भोपाल के MPMLA कोर्ट ने अभिषेक के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया था। वहीं बनर्जी की ओर से दायर याचिका में कहा गया था कि वह वर्तमान में एक सांसद हैं, ऐसे में उनके फरार होने की संभावना नहीं है। बेंच ने याचिका की सुनवाई करते हुए 12 नवंबर 2025 को गिरफ्तारी वारंट के निष्पादन पर रोक लगा दी थी।
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